काशी के सब तीर्थों में दशाश्वमेध तीर्थ की महिमा अलग है। मैंने पहली बार अपने दादा जगतदेव शर्मा के साथ पहली बार यहां स्नान किया। दादा बताते थे कि ज्येष्ठ मास के शुक्लपक्ष की प्रतिपदा, जेठ सुदी द्वितीया और गंगा दशहरा व मास की दशमी तिथि पर इस दशाश्वमेधतीर्थ में स्नान करने से जन्मों के पाप तुरंत नष्ट हो जाते हैं। हम बचपन से अपने दादा के साथ इन तिथियों पर स्नान, दान और दर्शन दशाश्वमेध तीर्थ पर अवश्य करते हैं। - मनोज शर्मा, तीर्थ पुरोहित
दशाश्वमेध तीर्थ पर स्नान, दान, जप होम, वेदाध्ययन, देवपूजन, संध्योपासन, तर्पण और श्राद्ध इत्यादि पितृकर्म या जो कुछ सत्कर्म किए जाते हैं, वे सब अक्षय कहे गए हैं। प्रतिपदा से दशमी तक प्रत्येक तिथियों में क्रम से स्नान करने वाला पापों से मुक्त हो जाता है। बचपन से ही हम लोग सपरिवार स्नान करते आ रहे हैं। हालांकि जानकारी के अभाव में अब ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष में स्नान करने वालों की संख्या कम हो गई है। - कन्हैयालाल त्रिपाठी, अध्यक्ष, काशी तीर्थ पुरोहित समाज
दशाश्वमेध तीर्थ पर स्नान करके दशाश्वमेधेश्वर महादेव के दर्शन करने वालों को गर्भदशा से मुक्ति मिल जाती है। पापों से मुक्ति की कामना से हर साल हम लोग दशाश्वमेध तीर्थ पर स्नान करते आ रहे हैं। बचपन में मैं जब स्नान करने आता था तो भीड़ बहुत ज्यादा हुआ करती थी लेकिन अब तिथि विशेष पर स्नान करने वालों की संख्या साल दर साल कम होती जा रही है। - अजय शर्मा, अध्यक्ष, केंद्रीय ब्राह्मण महासभा
दशाश्वमेध घाट के निकट घर होने के कारण बचपन से पिता जी के साथ नित्य गंगा स्नान और दर्शन-पूजन का सिलसिला जारी है। ज्येष्ठ मास की प्रतिपदा, गंगा दशहरा और मास दशमी तिथि पर यहां स्नान दान का फल अनंत है। पहले पिताजी के साथ आता था लेकिन अब पिताजी नहीं रहे तो मैं अपने बेटे के साथ ज्येष्ठ मास के स्नान के लिए जरूर आता हूं। स्नान के बाद दान की परंपरा भी निभाई। - कन्हैया दुबे, केडी, गीतकार