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गंगा दशहरा: 23 साल बाद पंच योग व चित्रा नक्षत्र में होगी गंगा की पूजा, करें इन मंत्रों का जप; दूर होंगी बाधाएं

Sat, 08 Jun 2024 08:03 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी

सार

Varanasi News: शास्त्रों में वर्णन है कि मां गंगा तीनों लोकों में बहती हैं। इसलिए उन्हें त्रिपथगामिनी कहा जाता है। स्वर्ग में मंदाकिनी और पाताल में भागीरथी कहा जाता है। जबकि पृथ्वीलोक पर मां गंगा या जाह्नवी के नाम से जाना जाता है। गंगाजल का प्रयोग जन्म से लेकर मृत्यु तक के सभी अनुष्ठानों व संस्कारों में जरूरी माना गया है।
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दशाश्वमेध घाट पर गंगा में स्नान करते लोग। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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23 साल बाद चित्रा नक्षत्र और पंच महायोग में गंगा दशहरा मनाया जाएगा। मानस, वरीयान, सर्वार्थ सिद्धि योग, रवि योग और अमृत सिद्धि योग का शुभ मुहूर्त बन रहा है, जो काफी फलदायी है। इस दिन मां गंगा की पूजा व आरती होगी। दशाश्वमेध घाट पर विशेष पूजन आरपार की चुनरी चढ़ाई जाएगी।

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गंगा दशहरा के दिन ही भगवान शंकर की जटा से वृषभ लग्न में मां गंगा धरती पर अवतरित हुईं थीं। इस दिन पूजन अर्चन का विशेष महत्व है। गंगा स्नान व पूजन से कोटि पुण्य का फल मिलता है। भक्त 10 आम, 10 दीप, 10 फूल से मां गंगा का षोडशोपचार पूजन होता हैं। 

आचार्य रामप्रवेश पांडेय, आचार्य दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री ने बताया कि 23 साल बाद गंगा दशहरा पर पंच योग बन रहा है, जो कि पूजा पाठ के लिए उत्तम माना गया है। भविष्य पुराण और स्कंद पुराण में गंगा दशहरा पर पूजन और स्नान का विशेष महत्व बताया गया। गंगा स्नान के समय 'ॐ नमो भगवति हिलि हिलि मिलि मिलि गंगे माँ पावय पावय स्वाहा' मंत्र का जप करना चाहिए।

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10 तरह के पापों का होता है नाश

संस्कृत में दश का अर्थ है दस और हरा का नष्ट करना होता है। इस दिन गंगा में स्नान करने से व्यक्ति के दस पापों या दस जन्मों के पापों से मुक्ति मिलती है। जिनकी कुंडली, जन्म के बारे में कोई जानकारी नहीं मिलती है तो उनके स्नान और पूजन करने से उनके सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं।

16 जून को ये है लग्न व मुहूर्त
ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि 15 जून को रात 1:02 बजे से अगले दिन 16 जून को रात 2:54 बजे तक रहेगी। जबकि वृषभ लग्न 16 जून को दोपहर 3:10 से शाम 5:06 बजे तक रहेगा। गंगा दशहरा 16 जून को मनाया जाएगा।
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