बाढ़ पीड़ितों को मिला एक महीने का राशन :
सीएम योगी आदित्यनाथ ने बाढ़ पीड़ितों से कहा कि उन्हें एक महीने के लिए राहत सामग्री समेत अन्य जरूरी चीजें दी जा रही है। गोयनका इंटर कॉलेज में बाढ़ के कारण शरण लिए हुए 51 परिवार के 217 लोगों के बीच राहत सामग्री का वितरण किया गया। राहत पैकेट में 10 किलो आलू, पांच किलो लाई, 10 किलो आटा, 10 किलो चावल, 2 किलो भुना चना, 2 किलो अरहर दाल, आधा किलो नमक, 750 ग्राम मसाला, 10 पैकेट बिस्किट, 1 लीटर तेल, माचिस, एक पैकेट मोमबत्ती शामिल हैं।
बलिया में गंगा का रौद्र रूप जारी
बलिया में गंगा के साथ ही घाघरा में पानी का जलस्तर इतना बढ़ गया है कि खतरे के निशान से 11 11 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। बाढ़ का पानी कई किलोमीटर क्षेत्र में फैल गया है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार शनिवार को जल स्तर 64.12 मीटर दर्ज किया गया जो लाल निशान 64.01 से 11 सेंटीमीटर अधिक है। आयोग ने अगले 24 घंटे में जलस्तर में वृद्धि होने का पूर्वानुमान किया है।
उदय छपरा के उपाध्याय टोला में अचानक हुए भीषण कटान से चारों तरफ मची अफरा-तफरी मच गई। मौके पर एनडीआरएफ ने मोर्चा संभाला। उधर, गंगा और घाघरा नदी में लगातार जलस्तर बढ़ता जा रहा है। इससे पूरे जनपद में एक बड़ी बाढ़ की स्थिति उभरती दिखाई दे रही है। प्रशासन भी सकते में हैं। राहत और बचाव कार्य तेज कर दिए गए हैं।
वाराणसी, बलिया, गाजीपुर, सहित पूर्वांचल के जिलों में अधिकारी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं। एनडीआरएफ की टीमें बाढ़ पीड़ितों को सुरक्षित स्थानों पर ले जा रही हैं, तो वहीं अधिकारी माइक से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए सूचित कर रहे हैं। गाजीपुर जिले में कई गावों का संपर्क टूट चुका है। सभी बाढ़ प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया जा रहा है।
खतरे के निशान के पार पहुंचीं गंगा :
मिर्जापुर जिले में गंगा खतरे के निशान के करीब पहुंच रही है। शनिवार को 77.920 मीटर जलस्तर रिकार्ड किया गया। जिले में खतरे का निशान 77. 724 मीटर निर्धारित है। इस समय जिले के 495 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। इस समय आधा सेमी प्रति घंटा की दर से गंगा का जल स्तर बढ़ रहा है।
एडीएम यूपी सिंह ने बताया कि इसमें सदर तहसील के 389 व चुनार तहसील के 106 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। जिले के छानबे, कोन, सिटी, मझवां, सीखड़ व नरायनपुर ब्लाक के गांव भी बाढ़ से प्रभावित हैं।
गाजीपुर :
गंगा नदी में लगातार बढ़़ाव के बाद गुरुवार की सुबह लहरों में ठहराव आया है। हालांकि अभी गंगा खतरे के निशान (63.10 मीटर) से करीब एक मीटर ऊपर बह रही हैं। सैकड़ों गांव तथा फसलें डूब गई हैं। इस खबर के बाद लोगों की चिंता अब थोड़ी कम हुई है। गुरुवार को दोपहर के समय में गंगा का जलस्तर 64.180 मीटर तक पहुंच गया है। गंगा के स्थिर होने के बाद से सिधाघर घाट में टोंस नदी, सैदपुर में गोमती, कठवा में घरों में पानी घुस गया है।
हालांकि इन लोगों के लिए प्रशासन की ओर से न तो अब तक उचित शरणस्थली की सुविधा दी गई न ही खाने पीने के सामानों की व्यवस्था ही की गई है। हालांकि स्थानीय विधायक की ओर से इस ओर जरूर पहल की गई है। वहीं कुछ सामाजिक संगठन भी इस दिशा में आगे आए हैं।
जौनपुर जिले में बढ़ने लगा गोमती नदी का जलस्तर :
गंगा नदी के जलस्तर में वृद्धि के चलते गोमती का जलस्तर भी बढ़ने लगा है। पिछले 24 घंटे के भीतर गोमती नदी के जलस्तर में दो फीट की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। चंदवक के बरामनपुर और आसपास के तटवर्ती गांव में नदी का पानी घुस गया है। करीब 25 एकड़ से अधिक फसल डूब गई। तटवर्ती इलाके के लोग गोमती के बढ़ते जल स्तर से भयभीत है। गोमती नदी गाजीपुर में कैथी के पास गंगा नदी में मिलती है। गंगा का जलस्तर बढ़ाव पर होने के चलते गोमती में पानी का दबाव तेजी से बढ़ रहा है।
चंंदौली :
चंदौली जिले में बाढ़ केंद्रीय जल आयोग के अनुसार गंगा का खतरे का निशान 71.40 मीटर है। शनिवार को गंगा का जलस्तर जलस्तर 71.50 मीटर तक पहुंच गया था।, यानी कि गंगा ने खतरे का निशान पार कर लिया है। वहीं अभी भी एक सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से गंगा का जल स्तर बढ़ रहा है। पड़ाव संवाददाता के अनुसार गंगा का पानी गांव में सिवान से होते हुए घरों तक पहुंच गया है।
इससे लोग सुरक्षित आशियाने की तलाश में जुट गए हैं। क्षेत्र के बहादुरपुर, रतनपुर, मढिया, जलीलपुर, सूजाबाद, डोमरी, कूंडा आदि गांवों में घरों तक पानी पहुंच गया है। पड़ाव, धानापुर, चहनियां के करीब 6 गांव में बाढ़ का पानी घुस गया है। जिले में 42 बाढ़ चौकियां स्थापित की गई हैं। प्रभावित क्षेत्रों में 150 नावें तैनात प्रशासन ने की हैं। कलेक्ट्रेट से भी निगरानी हो रही है।
भदोही में गंगा ने खतरा बिंदु पार किया :
भदोही जिले में भी गंगा ने खतरा निशान (80 मीटर) पार कर लिया है। शनिवार को जलस्तर 80.375 पहुंच गया। एक सेमी प्रति घंटे की गति से बढ़ोतरी हो रही है। इसमें उतार चढ़ाव भी हो रहा है। उधर कटान के कारण छेछुआ और भुर्रा गांवों गांवों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। लहलहाती फसल समेत उपजाऊ भूमि गंगा में समाती जा रही है। सीमावर्ती गांवों में बाढ़ के कारण हालात विकट होते जा रहे हैं। कोनिया क्षेत्र के दर्जन भर से अधिक गावों में 500 बीघा फसल पानी में डूब गई है। दो दिनों में छेछुआ-भुर्रा में एक बिस्वा जमीन कटान की भेंट चढ़ गई। 2013 में 81 मीटर से अधिक जलस्तर जाने से हाहाकार मच गया था।