14 वर्ष की उम्र में मुजफ्फरपुर के एक थाने में 1942 में झंडा फहराने के लिए इकठ्ठे हुए थे कि अंग्रेजों को भनक लग गई। पुलिस आकर कई लोगों को पकड़ कर ले गई। डेढ़ वर्ष तक मोतिहारी जेल में बंद रहने के दौरान भारत माता की जय के नारे लगाने पर भी पिटाई होती थी।
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उन्होंने बताया कि आजादी का जुनून है कि आज भी कोई बुलाए न बुलाए, 15 अगस्त को कलेक्ट्रेट में जाकर झंडारोहण में शामिल होते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना करते हुए बिरेंद्र मुखर्जी कहते हैं कि इच्छाशक्ति के चलते अनुच्छेद 370 को हटाया जा सका, जो बहुत ही अच्छा हुआ।