आम तौर पर गर्मी के मौसम में आग लगने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। इसमें कहीं ट्रांसफार्मर जलने से घटनाएं होती हैं तो कहीं खेतों में फसल कटाई के बाद आग लगाने की वजह से घटनाएं होती हैं। इसके अलावा अन्य घटनाएं होती हैं और कई झुलस जाते हैं। उसके इलाज के लिए बीएचयू, मंडलीय अस्पताल ही एक मात्र जगह है। अगर यहां सुविधाएं नहीं बढ़ाई गईं तो समस्या बढ़ सकती हैं।
बीएचयू में भी सुविधाएं नाकाफी, महज सात बेड की सुविधा
बीएचयू अस्पताल में बर्न वाले मरीजों के लिए सुविधाएं भी नाकाफी हैं। यहां सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक में भी केवल सात बेड बर्न के मरीजों के लिए हैं, जो अधकितर समय फुल ही रहते हैं। यहां न केवल वाराणसी बल्कि आसपास के जिलों से भी मरीज रेफर होकर आते हैं।
इस तरह की स्थिति तब है जब बीएचयू अस्पताल में प्लास्टिक सर्जरी विभाग हैं और यहां विशेषज्ञ भी हैं। ट्रॉमा सेंटर परिसर में 50 बेड का बर्न वार्ड बनाया जाना है। इसके बाद जलने की घटनाओं में घायलों के इलाज में राहत होगी।
वर्जन
बर्न के मरीजों के लिए शास्त्री अस्पताल में 20 बेड का नया वार्ड बनाए जाने की प्रक्रिया चल रही है। इसके अलावा मंडलीय अस्पताल में सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक बनने के बाद भी बर्न वार्ड, प्लास्टिक सर्जन की तैनाती सहित अन्य सुविधाएं रहेंगी। - डॉ. संदीप चौधरी, सीएमओ