भाजपा के पूर्व विधायक रामइकबाल सिंह सोमवार शाम कटान पीड़ितों का हाल जानने दुबे छपरा पहुंचे। फल, बिस्किट और ब्रेड का वितरण किया। पूर्व विधायक ने कहा कि बलिया की जनता को नेशनल हाईवे नहीं बाढ़ और कटान से निजात चाहिए। कुछ जनप्रतिनिधि समाचार पत्रों में कभी नेशनल हाईवे तो कभी ग्रीनफील्ड-वे का राग अलापते रहते हैं। जनपद की मूल समस्या बाढ़ और कटान है। ईमानदारी से काम हुआ होता तो आज यह नौबत नहीं आती। सरकार से पूछा कि क्या कारण है कि गीता प्रेस का बनवाया रिंग बंधा पूरे दुबेछपरा का सुरक्षा कर रहा था। जब से इस बंधे पर सिंचाई विभाग कार्य कराने लगा, तब से 133 करोड़ खर्च भी हो गए और गांव भी नहीं बचे। अभी भी उद्योगपति बिड़ला का बनवाया बंधा टेंगरही से जयप्रकाश नगर तक बाढ़ से सुरक्षा कर रहा है। अब कोई उद्योगपति ऐसा कार्य नहीं कराता? सरकार उनसे पैसा लेकर अब स्वयं कार्य करा रही है।
विकास के लिए धन ऊपर से नीचे आता है। फिर नीचे से ऊपर की तरफ कमीशन के रूप में चला जाता है। जो बचता है वो ठेकेदार का हो जाता है। ऐसे में कटान कैसे रुकेगी। गंगा का पानी बनारस में भी आता है। रामनगर किले में लड़ने के बाद उसकी धारा कमजोर हो जाती है। उसी प्रकार प्रयागराज में भी यमुना का पानी किले में लड़ने के बाद शिथिल हो जाता है। वहां कटान नहीं होती। वैसी व्यवस्था बलिया में क्यों नहीं की जाती। 133 करोड़ रुपए में बलिया से जयप्रकाश नगर तक पांच मीटर चौड़ा सरिया लगाकर गिट्टी-सीमेंट की ढलाई हो जाती और कटान से मुक्ति मिल जाती। द्वाबा की जनता को जागना होगा। आंदोलन छेड़ना होगा।