पिछले दिनों अमेरिका में राहुल गांधी ने भारतीय सिखों के कड़ा पहनने व पगड़ी पहनने को लेकर बयान दिया था और कहा था कि भारत में सिखों को पगड़ी पहनने, कड़ा पहनने और गुरुद्वारे जाने से रोका जाता है। इसे लेकर वाराणसी के भाजपा महानगर उपाध्यक्ष अशोक कुमार ने तहरीर दी थी।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के खिलाफ अमेरिका में सिख समुदाय, दलित और पिछड़ों के आरक्षण पर गलत बयानबाजी के आरोप में शुक्रवार को सिगरा थाने की पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है। आरोप है कि राहुल गांधी ने देश की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने का कृत्य किया है।
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भाजपा जिलाध्यक्ष एमएलसी हंसराज विश्वकर्मा और महानगर अध्यक्ष विद्यासागर राय के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ता शुक्रवार को सिगरा थाने पहुंचे। रंगिया महाल, अंधरापुल निवासी भाजपा के महानगर उपाध्यक्ष अशोक कुमार ने सिगरा थानाध्यक्ष को तहरीर दी। उन्होंने कहा कि वह अनुसूचित जाति के सदस्य हैं।
गत 11, 12 और 13 सितंबर को न्यूज चैनलों और समाचार पत्रों में उन्होंने देखा व पढ़ा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अमेरिका में कहा कि भारत में सिखों को पगड़ी व कड़ा पहनने से रोका और गुरुद्वारा नहीं जाने दिया जाता है। राहुल गांधी ने जानबूझकर ऐसा बयान दिया। उनकी मंशा सिख समुदाय के लोगों को उत्तेजित और विद्रोह के लिए प्रेरित करने की थी।
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उन्होंने दलितों-पिछड़ों के आरक्षण को भी खत्म करने की बात अमेरिका में कही थी। इस बयान से उन्होंने दलित-पिछड़े समुदाय की भावनाओं को आहत करने के साथ ही उन्हें उकसाने का काम किया। अमेरिका में दिए गए राहुल गांधी के बयानों से देश की एकता और अखंडता को खतरा पैदा होने का भय हो गया है। भारतीय नागरिक होने के कारण वह भी चिंतित और भयभीत हैं। उधर, इस संबंध में सिगरा थानाध्यक्ष मनोज कुमार मिश्रा ने बताया कि तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। जांच में सामने आए तथ्यों और साक्ष्य के आधार पर मामले में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
क्या कहती है भारतीय न्याय संहिता की धारा 152
जो कोई भी जानबूझकर मौखिक, लिखित शब्दों, संकेतों, दृश्य चित्रण, इलेक्ट्रॉनिक संचार, वित्तीय साधनों के उपयोग, अलगाव, सशस्त्र विद्रोह या फिर विध्वंसक गतिविधियों को उत्तेजित करता है। उत्तेजित करने का प्रयास करता है। अलगाववादी गतिविधियों की भावनाओं को प्रोत्साहित करता है। भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालता है। ऐसे किसी कृत्य में लिप्त होता है उसे आजीवन कारावास या फिर कारावास से जो सात वर्ष तक का हो सकेगा, से दंडित किया जा सकता है। जुर्माने का भी प्रावधान है।