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वाराणसी: डीरेका के टेक्नोलॉजी सेंटर में आग से लाखों के कंप्यूटर जले

Wed, 16 Sep 2020 07:13 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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मौके पर पहुंची दमकल की गाड़ियां। - फोटो : अमर उजाला
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वाराणसी के डीरेका स्थित प्रशासनिक भवन के टेक्नोलॉजी सेंटर में बुधवार की अलसुबह भीषण आग लग गई। आग बुझाने में डीरेका, सेंट जांस और गेल इंडिया के फायर ब्रिगेड को काफी मशक्कत करनी पड़ी। टेक्नोलॉजी सेंटर की दूसरी मंजिल पर लगी आग बुझाने के दौरान आरपीएफ वर्कशॉप इंचार्ज सहित पांच जवान जख्मी हो गए। क्रेन से ऊपरी मंजिल की खिड़कियों में लगे शीशे को तोड़कर करीब 3 घंटे बाद सुबह 9 बजे आग पर काबू पाया गया। वहीं डीरेका प्रशासन ने घटना की जांच को लेकर पांच सदस्यीय टीम गठित की है। आग से लाखों के कंप्यूटर जलने के अनुमान लगाए जा रहे हैं।  

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डीजल रेल इंजन कारखाना परिसर में भंडार विभाग का सेक्शन है। सुबह करीब 6 बजे प्रशासनिक भवन के प्रौद्योगिकी केंद्र में आग लगने की सूचना मिली और तब तक फायर अलार्म भी परिसर में गूंजने लगा। राहत व बचाव को लेकर डीरेका फायर ब्रिगेड, गेल इंडिया की फायर गाड़ी मौके पर तत्काल पहुंच गई। पहली व दूसरी मंजिल में लगी विकराल आग बुझाने को लेकर भेलूपुर फायर ब्रिगेड और परिसर में स्थित सेंट जांस की आग बुझाने वाली गाड़ियां बुलाई गईं।

आग की बढ़ती लपटों को देखकर ऊपरी मंजिल के ऑफिस की बंद खिड़कियों के शीशे को तोड़ना शुरू किया गया, ताकि बाहर से फोर्स के साथ पानी की बौछार मारी जा सके। शीशा तोड़ने में आरपीएफ वर्कशॉप इंचार्ज निरंजन सिंह, जवान अरविंद झा व अन्य तीन जवान जख्मी हो गए।
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मौके पर पहुंचे मुख्य संरक्षा अधिकारी नितिन मेहरोत्रा ने बताया कि प्रथम दृष्टया शार्ट सर्किट से टेक्नोलॉजी सेंटर के भंडार सामग्री कक्ष व इंपोर्ट सेक्शन में आग लगने की बात सामने आ रही है। इंपोर्ट सेक्शन में लकड़ी के फर्नीचर से आग बढ़ी और कंप्यूटर कक्ष में पहुंच गई।

प्रौद्योगिकी भवन के प्रथम व द्वितीय तल के कई कंप्यूटर व फाल सीलिंग, एसी, वेतन बिल छापने वाली मशीन सहित काफी समान जलकर नष्ट हो गया है। मुख्य जनसंपर्क अधिकारी वैभव सुहानी ने बताया कि घटना की जांच को लेकर उप मुख्य संरक्षा अधिकारी यूएस श्रीवास्तव की निगरानी में 5 सदस्यीय कमेटी गठित की गईं है। यह टीम नुकसान का आंकलन, आग के कारणों सहित अन्य पहलुओं की जांच कर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।   

कंप्यूटर ऑन करके छोड़ जाते थे कई कर्मी

टेक्नोलॉजी सेंटर में सुबह 9 बजे से जिनकी ड्यूटी थी, उनके आने का क्रम शुरू हुआ। हालांकि आग की सूचना से अंजान कितने कर्मी घटनास्थल पर पहुंचे तो नजारा देख सन्न रह गए। इन्हीं कर्मियों के बीच में कुछ लोगों ने कहा कि कोई कर्मी अपना कंप्यूटर बंद करके नहीं जाता था। रोजाना सबके सिस्टम ऑन रहते थे। संभवत: आशंका जताई जा रही है कि एक साथ दर्जनों सिस्टम ऑन होने के चलते शार्ट सर्किट से आग लग सकती है।   
 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

संयोग अच्छा, बच गई जान  

मौजूद कर्मियों के अनुसार यह संयोग अच्छा था कि आग अल सुबह लगी। यदि यही आग 10 बजे के बाद लगी होती तो कर्मियों को जान बचाना मुश्किल हो जाता। करीब 9.30 बजे के बाद जब आग पूरी तरह से बुझ गई तो कुछ सेक्शन के कर्मी मौके पर पहुंचे। कर्मियों का कहना था कि जो कुछ बचा है, उसे ही संभाल लिया जाए। 

इंपोर्ट सेक्शन में आग की आंच बड़ी  

डीरेका में अगलगी की आंच बड़ी है। कई बिंदुओं पर इसकी जांच शुरू हो गई है। जितने कर्मी उतनी तरह की बातें भी हो रही है। खरीद बिक्री को लेकर पहले से भी डीरेका में कई कांड हो चुके हैं। दबी जुबान से कुछ कर्मियों ने इस घटना की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। जिस इंपोर्ट सेक्शन में आग लगी है, उसमें कई महत्वपूर्ण फाइलें होती हैं।

बाहर से आने वाली मशीनों और अन्य सामानों के खरीद बिक्री से संबंधित दस्तावेज रहते हैं। इत्तफाक या कुछ और कि सबसे पहले आग लगी तो इसी सेक्शन में। अधिकारी भी मान रहे हैं कि आग किन परिस्थितियों में लगी है, यह बड़ा प्रश्न है। घटनास्थल पर वास्तविक स्थिति जानने के लिए पहुंचे मीडियाकर्मियों को अंदर नहीं जाने दिया गया। इस तरह की आग डीरेका में कभी नहीं लगी थी। एक माह पूर्व डीरेका के डिजाइन ऑफिस में एसी शार्ट सर्किट से हल्की आग लगी थी।
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