जिला मुख्यालय में सोमवार को विशेष न्यायाधीश पास्को राजेंद्र त्रिपाठी की अदालत ने फूलपुर थाने के एक दुष्कर्म मामले में आरोपी पिता और पुत्र को अपहरण व दुराचार के आरोप से बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि आरोपी द्वारा पीड़िता को जबरदस्ती घसीट कर मुंबई से दिल्ली, बड़ौदा नहीं ले जाया गया, बल्कि वह बालिग थी और अपनी मर्जी से बिना किसी विरोध के गई थी।
पीड़िता ने ट्रेन में लंबी यात्रा की लेकिन किसी सहयात्री या टीटी ने अपहरण करके ले जाने की बात नहीं कही। पीड़िता ने कोई दुराचार का कथन नहीं किया, बल्कि रेलवे प्रतीक्षालय में दुराचार की बात कही गई है, जिसमें खालिसपुर रेलवे स्टेशन मास्टर का बयान महत्वपूर्ण रहा कि घटना के समय लगभग चार ट्रेन वहां खड़ी थी। ऐसे में दुराचार संभव नहीं है। अदालत ने पीड़िता व आरोपी के बीच सहमति पर शारीरिक संबंध आधारित बताया जो दंडनीय नहीं है। साथ ही अदालत ने पास्को एक्ट में भी पीड़िता को बालिग पाया। अदालत ने इन परिस्थितियों में आरोपी पिता उमा दीक्षित व पुत्र राजन दीक्षित को बरी कर दिया। आरोपी पक्ष की पैरवी अधिवक्ता अजय उपाध्याय व विनय पांडेय ने की।