वाराणसी। मूल रूप से बड़ागांव थाना के अकोढ़ा गाव के रहने वाले बलवंत सेवानिवृत्त डीआईजी सभाजीत सिंह के बेटे थे। मौके से मिले खोखे के आधार फोरेंसिक टीम ने स्पष्ट किया है कि घटना में .32 बोर की देसी पिस्टल प्रयोग की गई।
उधर, घटना के बाद पुलिस ने दो बार शव कब्जे में लेने की कोशिश की, लेकिन घरवालों के विरोध के चलते शव कब्जे में नहीं लिया जा सका। घरवालों का कहना है कि जब तक आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया जाता है तब तक शव नहीं सौंपेंगे। बाद में मौके पर पहुंचे एसएसपी ने परिजनों को समझाया तब जाकर परिजन शव सौंपने के लिए तैयार हुए। एसएसपी ने कहा कि आरोपी किसी भी हाल में बचने नहीं पाएंगे।
लड़ चुके थे प्रधानी का चुनाव
बलवंत के पिता ने कई साल पहले तरना में मकान बनवाया था, तब से बलवंत यहीं रह रहे थे। वह गांव में प्रधानी का चुनाव भी लड़ चुके थे।