लगातार वारदात से पुलिसिंग पर उठे गंभीर सवाल
जिले की कानून व्यवस्था को बदमाश आए दिन चुनौती दे रहे हैं और पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी हुई है। इन वारदातों ने थानेदारों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं लेकिन लापरवाही के लिए उन पर कार्रवाई नहीं होती है, जो जिले में चर्चा का विषय बनी हुई है।
सारनाथ थाना अंतर्गत अशोक विहार कालोनी फेज-2 में बलवंत सिंह की हत्या किए जाने से पहले 16 अक्तूबर की रात चौबेपुर क्षेत्र में बुजुर्ग किसान की गला दबाकर हत्याकर दी गई थी। इससे पहले सुंदरपुर क्षेत्र में एक किशोर की चाकू से गोदकर हत्या की गई थी। बीते 30 सितंबर को सदर तहसील परिसर में सारनाथ क्षेत्र निवासी बस संचालक को गोलियों से छलनी कर दिया गया था। सितंबर के आखिरी में ही बीएचयू परिसर में बुजुर्ग चाय-पकौड़ा विक्रेता की सिर कूचकर हत्याकर दी गई थी। इसी तरह से कैंट थाना क्षेत्र में चौकीदार की हत्या और मंडुवाडीह क्षेत्र में दो वृद्ध महिलाओं का अपहरण कर हत्याकर दी गई थी। यह सभी वारदात ऐसी है जिनका खुलासा करना तो दूर पुलिस हत्यारोपियों को चिह्नित भी नहीं कर सकी है।
बुलेटप्रूफस्कार्पियो भी नहीं बचा पाई जान
अस्पताल में परिजनों ने बताया कि बलवंत बुलेटप्रूफ स्कार्पियो से चलते थे। दो बच्चों के पिता बलवंत अपने व्यवसाय के कारण सतर्कता बरतते थे लेकिन सब कुछ धरा का धरा रह गया। बलवंत की अपने पार्टनरों से कोई रंजिश भी नहीं थी। उधर रामगोपाल सिंह ने कहा कि गोली क्यों मारी गई, यह समझ में नहीं आ रहा है। मेरी जानकारी के अनुसार बलवंत की किसी से कोई रंजिश नहीं थी।