घरवालों ने भी उसके बचने की उम्मीद छोड़ दी। उनकी दोनों किडनी काम करनी बंद कर दी थी। यहां कोई भर्ती लेने को तैयार नहीं था, तो हमने एक बार फिर से उनको भर्ती करवाया। डायलिसिस भी करवाना पड़ा। अब महिला की सेहत में तेजी से सुधार हुआ है।
हृदय रोग विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. ओमशंकर ने कहा कि एक चिकित्सक के तौर पर आज तक मुझे ऐसे लाखों मरीजों की सेवा करने और जान बचाने का अवसर मिला है। जब भी ऐसे किसी जरूरतमंद लोगों की मदद कर पाता हूं तो बड़ी सुखद अनुभूति होती है। यही मेरे जीवन की कमाई है। माता-पिताजी का शुक्रिया है कि उन्होंने मुझे इस लायक बनाया।
हृदय रोग विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. ओमशंकर
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प्रोफेसर ओमशंकर ने महिला के इलाज के बारे में बताते हुए इसे अपने जीवन की बड़ी उपलब्धि बताया। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि जितने दिन महिला बीएचयू में भर्ती रही, अगर उतने दिन किसी निजी अस्पताल में भर्ती रहती तो शायद इलाज का खर्च एक करोड़ से भी अधिक होता (जो इस देश के 99 प्रतिशत आबादी के बजट से बाहर है), जबकि यहां उनका एक लाख भी खर्च नहीं हुआ होगा। ऐसे में सरकारी अस्पतालों को सरकार द्वारा अधिक मजबूत करने और आम जनता को स्वास्थ्य के मौलिक अधिकार को सुनिश्चित करने की जरूरत है।
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