दोनों बकरों की कीमत पिछले साल ढाई लाख रुपये लगाई थी, लेकिन कोई खरीदार नहीं मिला था। इस बार इनकी कीमत दो लाख रुपये रखी है लेकिन कोई भी आगे नहीं आ रहा है। बेनिया में मंडी नहीं लगने के कारण मोहल्लों में मंडियां लग रही हैं। ऑनलाइन भी जानवरों की बिक्री की जा रही है, लेकिन मांग बहुत ज्यादा नहीं है। मंडी संचालक अनवर ने बताया कि इस बार जानवरों की कीमत पिछले साल के मुकाबले ज्यादा है।
बकरीद पर कुर्बानी के लिए खास माने जाने वाला दुंबा इस बार भी बाजार में नहीं है। बेनियाबाग में इस बार भी मंडी नहीं सजने के कारण बकरों की कीमत आम आदमी के बजट के बाहर जा रहा है। दालमंडी के शकील अहमद जादूगर ने बताया कि पिछले साल के मुकाबले इस बार बकरों की कीमत थोड़ी ज्यादा है।
पिछले साल जहां पांच हजार में बकरे मिल जा रहे थे, वहीं इस बार 15 हजार से शुरुआत हो रही है। अधिकतम कीमत 40 हजार तक है। वहीं दूसरी तरफ शहर के व्यापारियों ने ऑनलाइन बकरों की बिक्री शुरू कर दी है। वेबसाइट पर बकरा मालिक अपना पता भी अपलोड कर रहे हैं ताकि ग्राहक आकर भी देख सकें।