आशापुर के देवी प्रसाद मिश्रा कहते हैं कि अइसन लगत हव कि कहीं दूसरे शहर में आ गईल हई... जिधर जात हई उधर रास्ता खाली मिलत हव। आशापुर चौराहा से पहड़िया, अकथा तिराहा और पांडेयपुर चौराहा हमेशा ई-रिक्शा वालन से घिरल रहत रहल। कलरकोड व्यवस्था लागू होवे से ई-रिक्शा वालन के त पता नहीं, बाकी पब्लिकन के काफी राहत हव।
लंका के सीरगोवर्धन निवासी धर्मेंद्र यादव कहते हैं कि देखा व्यवस्था से खेलवाड़ नहीं करे के चाही। ई-रिक्शा वालन क मन बहुत बढ़ल रहल... छोट-छोट लइका भी लेके ई-रिक्शा सड़क पर निकल जात रहलन... बहरी ई-रिक्शा जादे बनारस में आके जाम के बढ़ावत रहलन। पुलिस क ई व्यवस्था जाम के काफी हद तक कम कर देही।
साकेत नगर निवासी पियूष मिश्रा कहते है कि बनारस में ई-बस नरक मचा देहले रहलन... जेहर देखा, उधरे ई-रिक्शा। पैदल रिक्शा वालन क कमाई मर गईल रहल... अब देखा ऊ सब भी कमा खा सकीहन। दूसर बात कि ई-रिक्शा वालन पर भी तनी लगाम लगी।