ज्ञानपुर नगर के बीच में स्थित हरिहरनाथ धाम पर दिनभर दर्शन-पूजन का दौर चला। महिला श्रद्धालुओं ने शाम को मंदिर परिसर में तुलसी विवाह कर दी जलाए। हालांकि कोरोना संक्रमण के कारण ज्यादातर श्रद्धालुओं ने घर पर ही तुलसी विवाह किया।
इसके बाद प्रसाद वितरण किया गया, फिर किसानों ने गन्ने की नई फसल का पूजन किया। तमाम किसान इसी दिन से गन्ने की नई फसल का सेवन शुरू करते हैं। गन्ने का पूजन सुबह से लेकर शाम पांच बजे तक किया गया। ज्योतिषियों के मुताबिक शाम 5.21 बजे के बाद भद्रा शुरू हो रहा था।
डुहियां (भावसिंहपुर) गांव के आचार्य पं. दीनानाथ शुक्ल ने बताया कि प्रबोधिनी एकादशी के दिन गन्ने का पूजन कर सेवन करना चाहिए। इससे सुख-समृद्धि प्राप्त होती है। कहा कि इसी दिन से तुलसी विवाहोत्सव आरंभ होकर कार्तिक पूर्णिमा तक चलता है। इस बार कार्तिक पूर्णिमा 30 नवंबर को पड़ेगी। दूसरी ओर बाजार में भी दिनभर खरीदारी हुई।