भए प्रगट कृपाला दीनदयाला कौशल्या हितकारी... की धुन पर पूरा धर्मसंघ प्रांगण झूम उठा। चहुंओर उत्सव का माहौल, हर कोई प्रभु भक्ति में लीन मंत्रमुग्ध होकर नाचने गाने लगे, एक दूसरे को बधाई देकर प्रभु के रंग में सराबोर हो उत्साह से अपने को रससिक्त करने को आतुर दिखलाई पड़ा। अवसर था रविवार को दुर्गाकुंड स्थित मणि मंदिर, धर्मसंघ के प्रांगण में करपात्र प्राकट्योत्सव के अवसर पर आयोजित 27 दिवसीय श्री रामकथा के नौवें दिन कथा में प्रभु श्री राम के प्राकट्य प्रसंग का।
कथा व्यास जोधपुर से पधारे प्रख्यात कथा वाचक संत मुरलीधर महाराज ने राम जन्म का अत्यंत ही मनोहारी वर्णन कर भक्तों को भावविह्वल कर दिया। कथा श्रवण कराते हुए मुरलीधर महाराज ने कहा कि प्रभु श्रीराम के जन्म पर पूरी अयोध्या नगरी मगन है, हर ओर आनंद ही आनंद है। हर कोई बस अपने प्रभु की एक झलक पाने को बेताब है। महीनों तक अवध में उत्सव ही चलता रहा और लोग उसमें खोए रहे।
उन्होंने कहा कि यही प्रभु की माया है कि जो भगवान के गुण में डूब जाता है उसके जीवन का कठिन समय भी कैसे बीत जाता है पता ही नहीं चलता। जीवन में जब भी कठिन समय आये, उस समय को प्रभु चरित्र को सुनने में लगाए। उन्होंने यह भी कहा कि असली आनंद वही है जिसमें दूसरे को कष्ट ना हो, यदि आपके आनंद से किसी और के जीवन में दुख पहुंचता है तो वह आनंद नहीं है। इस अवसर पर धर्मसंघ पीठाधीश्वर स्वामी शंकरदेव चैतन्य ब्रह्मचारी महाराज ने श्रद्धालुओं को रामजन्म की बधाई दी। व्यासपीठ का पूजन पंडित जगजीतन पांडेय, स्वामी रामगोपालानंद महाराज ने किया।