भगवान बृहस्पति का होगा पंचमुखी शृंगार
दशाश्वमेध स्थित भगवान बृहस्पति का एकादशी पर पंचमुखी शृंगार होगा। मंदिर के प्रधान पुजारी अजय गिरि ने बताया कि प्रभु को शिवलिंग पर पंचमुखी स्वरूप का शृंगार होगा। फल, मेवा व मोतीचूर का लड्डू आदि का भोग लगेगा।
दीप शृंगार होगा और लगेगा भंडारा
शाहूपुरी (पड़ाव) स्थित भगवान विष्णु मंदिर में भी दीप शृंगार होगा। महंत किरन बाबा ने बताया कि यह मंदिर 500 साल पुराना है। यहां एकादशी पर भक्त दर्शन पूजन करेंगे। शृंगार के साथ रात में विशेष आरती होती है। भंडारे में भक्त प्रसाद ग्रहण करते हैं।
आज रात को 11:05 से होगा शुरू
काशी विद्वत कर्मकांड परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष आचार्य अशोक द्विवेदी ने बताया कि देवउठनी एकादशी का व्रत 23 नवंबर को रखा जाएगा। कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी 22 नवंबर को रात में 11:05 बजे लगेगी। अगले दिन 23 नवंबर को रात 9:03 बजे तक रहेगी। इसके साथ ही विवाह मुहूर्त शुरू हो जाएगा।
शालीग्राम-तुलसी का होगा विवाह
एकादशी पर भगवान विष्णु के जागृत होते हैं तो वहीं तुलसी जी का विवाह शालिग्राम से होता है। परंपरानुसार महिलाएं समूह में तुलसी के पौधे के समक्ष बैठक कर पूजन-अर्चन करती हैं। तुलसी जी को नया वस्त्र धारण कराती हैं, दूध, गंगाजल से नहलाती हैं। घी का दीप जलाती हैं। मंगल गीतों के साथ विवाह की परंपरा को निभाती हैं। शहर में घरों के अलावा कई कुंडों व विष्णु मंदिरों में इसका विधिवत पूजन होगा।