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UP: हत्या कर फेंके गए शव की 72 घंटे बाद हुई पहचान, 42 दिन पहले हुई थी युवक की शादी; दोस्तों संग निकला था घूमने

Sat, 15 Jun 2024 03:27 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

वाराणसी में हत्या कर फेंके गए शव की पहचान गाजीपुर के युवक के रूप में हुई है। उसके भाई ने बताया कि 10 जून को युवक दोस्तों के साथ लखनऊ जाने की बात कह कर निकला था। 
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घटनास्थल पर मौजूद पुलिस (File) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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वाराणसी जिले के राजवारी (भंदहां कला) गांव में गोमती नदी के समीप बबूल के जंगल में गाजीपुर जिले के युवक की हत्या कर शव फेंका गया था। गाजीपुर के बिरनो थाना के तिलेसरा रसूलपुरा गांव निवासी प्रदीप यादव ने शव मिलने के तीन दिन बाद शुक्रवार को उसकी पहचान अपने बड़े भाई आलोक यादव (32) के रूप में की। इसके बाद चौबेपुर थाने की पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया।

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यह है पूरा मामला
प्रदीप यादव ने पुलिस को बताया कि तीन भाइयों में सबसे बड़ा आलोक सऊदी अरब में नौकरी करता था। गत तीन मार्च को वह घर आया था। नौ जून की रात उसने अपने दोस्तों के साथ क्षेत्र में ही पार्टी की थी। इसके बाद 10 जून को आलोक ने कहा कि वह अपने दोस्तों के साथ लखनऊ जा रहा है, 12 जून की रात तक घर आ जाएगा। प्रदीप ने कहा कि बुधवार की रात आलोक घर नहीं आया तो परिजनों ने सोचा कि वह लखनऊ ही रुक गया होगा। गुरुवार को भी आलोक घर नहीं आया तो परिजन चिंतित हुए और कॉल किए तो उसका मोबाइल स्विच ऑफ बता रहा था। 

शुक्रवार को आलोक की गुमशुदगी दर्ज कराने प्रदीप बिरनो थाने गया तो पुलिस कर्मियों ने बताया कि वाराणसी के चौबेपुर थाना क्षेत्र में एक युवक का शव मिला है। शव का फोटो देखते ही वह आलोक को पहचान गया और चौबेपुर थाने आया। उधर, इस संबंध में एसीपी सारनाथ डॉ. अतुल अंजान त्रिपाठी ने बताया कि शव की पहचान होने पर उसे पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया गया है। अंत्येष्टि के बाद परिजनों से जानकारी जुटा कर घटना का खुलासा किया जाएगा।

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21 अप्रैल को हुई थी शादी, 11 जून को मिला शव

प्रदीप ने बताया कि आलोक की शादी गत 21 अप्रैल को बलिया जिले के नगरा क्षेत्र के हरसेनपुर गांव की प्रतिभा यादव से हुई थी। आलोक शादी के उद्देश्य से ही सऊदी अरब से घर आया था। आलोक की मौत की जानकारी पाकर उसकी पत्नी प्रतिभा और मां सुशीला देवी का रो-रोकर बुरा हाल है। 

जिसके घर पार्टी हुई थी उसका पता नहीं
प्रदीप ने बताया कि जिसके घर पर नौ जून की रात पार्टी थी, उसको फोन करने पर उसने बताया कि वह दिल्ली है। उसके पिता ने बताया कि वह मध्य प्रदेश गया है। उसके पड़ोसियों ने बताया कि वह कश्मीर गया है। समझ में नहीं आ रहा है कि क्या से क्या हो गया? मृतक के भाई प्रदीप ने कहा कि हम लोगों की किसी से दुश्मनी नहीं है। आलोक की भी किसी से व्यक्तिगत रंजिश नहीं थी। अब पुलिस से ही उम्मीद है कि भाई के कातिलों को पकड़ कर उन्हें सजा दिलाएगी।
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ये हुआ था

आलोक का लहूलुहान शव वाराणसी-गाजीपुर हाईवे से 500 मीटर दूर पूर्व की ओर राजवारी (भंदहां कला) गांव में गोमती नदी के समीप बबूल के जंगल में 10 जून की सुबह मिला था। उसके सिर, आंख और कनपटी पर गहरे जख्म थे। शव के समीप अंग्रेजी शराब की खाली शीशी, प्लास्टिक के चार ग्लास, चिप्स के खाली पैकेट और काले रंग के दो मास्क पड़े थे। पुलिस के अथक प्रयास के बाद भी शव की पहचान नहीं हो पाई थी। 72 घंटे बीतने के बाद पुलिस शव का पोस्टमार्टम कराने की तैयारी में थी, तब तक प्रदीप चौबेपुर थाने पहुंच गया।
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