पूर्वांचल की सबसे बड़ी किराना की गोला दीनानाथ मंडी से छुहारा मानों छूमंतर हो गया है। आलम यह है कि आसपास के जिलों से आने वाले थोक व फुटकर व्यापारियों को बिना छुहारे के मायूस लौटना पड़ रहा है। जिनके पास स्टाक में छुहारा है भी तो उसका दाम 260-300 रुपये प्रति किलो में होने के चलते ग्राहकों से लेकर व्यापारियों तक के गले नहीं उतर रहा।
छह माह पूर्व मंडी में छुहारा से लदे पांच से छह ट्रक सप्ताह में एक से दो बार आते थे। एक ट्रक में लगभग 16 टन माल आता है। जब से टैक्स बढ़ा है छुहारा की आवक धीरे-धीरे कम होते-होते अब छह बोरी में सिमट गई है। यह भी छह बोरी माल नई दिल्ली से उन व्यापारियों द्वारा भेजा जा रहा है जो पूर्व में माल स्टाक करके रखे हुए थे। अब उन व्यापारियों ने भी हाथ खड़े कर दिए है। नई दिल्ली के कुछ व्यापारी ईरान से माल मंगा रहे हैं, लेकिन वह माल अभी बनारस की मंडी में नहीं पहुंच रहा है। हालांकि अफगानिस्तान से अफगानी ढाई इंच वाला छुहारा मार्केट में आने की बात व्यापारी कर रहे हैं।
पाकिस्तान से आने वाले सेंधा नमक की आवक में भी कमी आई है। यही कारण है कि 12 से 14 रुपये किलो में बिकने वाला सेंधा नमक 40 से 45 रुपये किलो में बिक रहा है। व्यापारियों ने अंदेशा जताया है कि आने वाले दिनों में सेंधा नमक भी ढूंढे नहीं मिलेगा।
डाईफ्रूट के बारे में भी कहा जाता है कि कुछ माल जैसे काजू, किसमिस भी पाकिस्तान से आता था, वह भी आवक ठप है। सांगली, नासिक से अब किसमिस गोला मंडी में पहुंच रहा है। डायबिटीज कंट्रोल में सहायक पनीर फूल भी पाकिस्तान से आता है। लेकिन इन दिनों वह भी नहीं आ रहा है।
पाकिस्तान से छुहारा नहीं आने के चलते मंडी में छुहारा नहीं मिल पा रहा है। रोजाना व्यापारी मायूस लौट रहे हैं। टैक्स बढ़ने से छुहारा की आवक ठप है।
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दुर्गा प्रसाद गुप्ता, संरक्षक, काशी किराना व्यापार मंडल, गोला दीनानाथ मंडी
पुलवामा प्रकरण के बाद पाकिस्तान से आयात पर बढ़े 200 फीसद टैक्स का असर है कि छुहारा की आवक ठप है। मंडी में छुहारा की किल्लत है।
मोहन बरनवाल, महामंत्री, काशी किराना व्यापार मंडल, गोला दीनानाथ मंडी