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महाभारत काल का दुर्योग बना कोविड- 19 महामारी का कारण, ज्योतिषी ने बताया- यह त्रासदी कब तक चलेगी

Thu, 13 May 2021 12:29 AM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

ज्योतिषाचार्य आचार्य ऋषि द्विवेदी ने बताया कि ज्योतिष की दृष्टि से देखा जाए तो हिंदी नववर्ष में खगोल मंडल में कई दुर्योग बने हुए हैं। 13 दिन का पखवारा धरती पर बड़ी महामारी, भारी जन-धन की हानि को दर्शा रहा है।
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आचार्य ऋषि द्विवेदी के अनुसार संवत परिवर्तन के बाद मार्च 2022 से मिलेगी राहत - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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वैश्विक महामारी कोविड 19 ने संपूर्ण विश्व में उथल-पुथल मचा रखी है। ज्योतिष के अनुसार महाभारत काल में बना पखवारे के योग का असर वर्तमान में नजर आ रहा है। 13 दिन का पखवारा धरती पर बड़ी महामारी भारी जन-धन की हानि को दर्शा रहा है। अत: भारत समेत विश्व पटल को 2021 तक सावधान रहने की आवश्यकता होगी।

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ज्योतिष शास्त्र में कहा गया है कि कालाधिनम जगत सर्वम अर्थात सभी कार्य समय के अधीन हैं और काल ज्योतिष शास्त्र के अधीन है। ज्योतिषाचार्य आचार्य ऋषि द्विवेदी ने बताया कि ज्योतिष की दृष्टि से देखा जाए तो हिंदी नववर्ष में खगोल मंडल में कई दुर्योग बने हुए हैं। 13 दिन का पखवारा धरती पर बड़ी महामारी, भारी जन-धन की हानि को दर्शा रहा है।

भाद्र शुक्ल पक्ष 13 दिनों का ही है। इसमें भाद्र शुक्ल प्रतिपदा व भाद्र शुक्ल त्रयोदशी का क्षय है। भाद्रशुक्ल का पखवारा 8 सितंबर से प्रारंभ होकर 20 सितंबर 13 दिनों तक रहेगा। हो सकता है कि इस वर्ष के 13 दिनों का ही पखवारा होने से महामारी चरम की ओर अग्रसर है। लेकिन 13 दिनों के पखवारे के बाद कुछ कमी जनहानि की होगी। लेकिन राहत की सांस संवत 2078 के जाने के बाद ही होगी। अर्थात मार्च 2022 के बाद।

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आचार्य द्विवेदी ने बताया कि देखा जाए तो 13 दिनों का पक्ष द्वापर युग के महाभारत काल में पड़ा था। अर्थात कलियुग का यह 5122 वर्ष चल रहा है। 5122 वर्ष पूर्व द्वापर युग था। उस समय 13 दिनों के पक्ष में महाभारत हुआ था। जिसमें भारी जन-धन हानि हुई थी।

कहने का अभिप्राय यह है कि यह 2078 में जहां कोरोना अधिकाधिक फैलकर मनुष्य को काल के गाल में ले रहा है। अंगारक योग तो राजा मंत्री मंगल का होना किसी भारी आपदा, प्राकृतिक आपदा, भूकंप सुनामी युद्ध को दर्शा रहा है।

13 दिनों के पक्ष में होती है जनहानि
ज्योतिष ग्रंथों ज्योतिष निबंधवाली तथा स्मृतिरत्नावली में कहा गया है कि यदा च जायते पक्षी त्रयोदशदिनात्मक:। भवेल्लोक क्षयोघोरो मुंडमालायुता मही।। यहां पर भी कहा गया है कि जिस पक्षों में दो तिथियों का क्षय होता है अर्थात 13 दिनों का ही पक्ष होता है उस वर्ष में भारी जन-धन हानि बड़ी लड़ाई, भयंकर द्वेष, किसी भी तरह से जनहानि होती है।

खगोल मंडल में बन रहे दुर्योग

हिंदी नववर्ष में खगोल मंडल में कई दुर्योग बन रहे हैं। सर्वप्रथम 2078 के लग्न में बना राहु, मंगल युति से अंगारक योग महामारी का एक यह भी कारण है। दूसरा इस वर्ष नव वर्ष के राजा और मंत्री मंगल हैं। शास्त्र के अनुसार जिस वर्ष राजा और मंत्री दोनों ग्रह पाप या क्रूर ग्रह हो तो वह वर्ष देश समाज के लिए शुभ नहीं माना जाता है।

तीसरा कारण 26 मई को चंद्रग्रहण जो भारत में खग्रास चंद्रग्रहण आंशिक रूप से भारत में सुदुर पूर्वोत्तर और पश्चिम बंगाल में कुछ भाग में दृश्य होगा। शास्त्र के अनुसार ग्रहण से पूर्व व ग्रहण लगने से आगे 15 दिनों तक इसका विशेष दुष्प्रभाव रहता है। चंद्रग्रहण भी एक खगोलीय घटना है। हालांकि इस प्रकार के खगोलीय घटना कुछ समय अंतराल पर घटती रहती है।

जिसका दुष्प्रभाव देखने को मिलता रहता है। लेकिन कोरोना के दूसरे स्ट्रेन में इस बार इनकी अहम भूमिका है। इससे पहले भी कई बार महामारी आ चुकी है इसलिए इस प्रकार के कई दुरुयोग आकाश मंडल में बने थे।
 
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महाभारत के भीष्म पर्व में है वर्णन

पक्ष के क्षय का वर्णन महाभारत के भीष्म पर्व में है। कहा गया है कि चतुर्दशी पंचदशी भूतपूर्वा च षोडशीम। इमाम तु नाभिजानेहममावस्यां त्रयोदशी:।। अपर्वणि ग्रहं यातौ प्रजा संक्षयमिच्छत:।। भीष्म पितामह कहते हैं कि 14, 15 और 16 दिनों के पक्ष तो रहते हैं इस वर्ष में इसी समय 13 दिनों का पक्ष आया है। अत: यह समय प्राणियों के लिए संहारक है।
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