आचार्य द्विवेदी ने बताया कि देखा जाए तो 13 दिनों का पक्ष द्वापर युग के महाभारत काल में पड़ा था। अर्थात कलियुग का यह 5122 वर्ष चल रहा है। 5122 वर्ष पूर्व द्वापर युग था। उस समय 13 दिनों के पक्ष में महाभारत हुआ था। जिसमें भारी जन-धन हानि हुई थी।
कहने का अभिप्राय यह है कि यह 2078 में जहां कोरोना अधिकाधिक फैलकर मनुष्य को काल के गाल में ले रहा है। अंगारक योग तो राजा मंत्री मंगल का होना किसी भारी आपदा, प्राकृतिक आपदा, भूकंप सुनामी युद्ध को दर्शा रहा है।
13 दिनों के पक्ष में होती है जनहानि
ज्योतिष ग्रंथों ज्योतिष निबंधवाली तथा स्मृतिरत्नावली में कहा गया है कि यदा च जायते पक्षी त्रयोदशदिनात्मक:। भवेल्लोक क्षयोघोरो मुंडमालायुता मही।। यहां पर भी कहा गया है कि जिस पक्षों में दो तिथियों का क्षय होता है अर्थात 13 दिनों का ही पक्ष होता है उस वर्ष में भारी जन-धन हानि बड़ी लड़ाई, भयंकर द्वेष, किसी भी तरह से जनहानि होती है।
हिंदी नववर्ष में खगोल मंडल में कई दुर्योग बन रहे हैं। सर्वप्रथम 2078 के लग्न में बना राहु, मंगल युति से अंगारक योग महामारी का एक यह भी कारण है। दूसरा इस वर्ष नव वर्ष के राजा और मंत्री मंगल हैं। शास्त्र के अनुसार जिस वर्ष राजा और मंत्री दोनों ग्रह पाप या क्रूर ग्रह हो तो वह वर्ष देश समाज के लिए शुभ नहीं माना जाता है।
तीसरा कारण 26 मई को चंद्रग्रहण जो भारत में खग्रास चंद्रग्रहण आंशिक रूप से भारत में सुदुर पूर्वोत्तर और पश्चिम बंगाल में कुछ भाग में दृश्य होगा। शास्त्र के अनुसार ग्रहण से पूर्व व ग्रहण लगने से आगे 15 दिनों तक इसका विशेष दुष्प्रभाव रहता है। चंद्रग्रहण भी एक खगोलीय घटना है। हालांकि इस प्रकार के खगोलीय घटना कुछ समय अंतराल पर घटती रहती है।
जिसका दुष्प्रभाव देखने को मिलता रहता है। लेकिन कोरोना के दूसरे स्ट्रेन में इस बार इनकी अहम भूमिका है। इससे पहले भी कई बार महामारी आ चुकी है इसलिए इस प्रकार के कई दुरुयोग आकाश मंडल में बने थे।
पक्ष के क्षय का वर्णन महाभारत के भीष्म पर्व में है। कहा गया है कि चतुर्दशी पंचदशी भूतपूर्वा च षोडशीम। इमाम तु नाभिजानेहममावस्यां त्रयोदशी:।। अपर्वणि ग्रहं यातौ प्रजा संक्षयमिच्छत:।। भीष्म पितामह कहते हैं कि 14, 15 और 16 दिनों के पक्ष तो रहते हैं इस वर्ष में इसी समय 13 दिनों का पक्ष आया है। अत: यह समय प्राणियों के लिए संहारक है।