बुधवार को रोजा इफ्तार के बाद चांद देखने की गहमागहमी शुरू हो गई लेकिन आसमान में बादलों के कारण कहीं से भी कोई तस्दीक नहीं हो सकी। शहर के मौलाना व उलेमा ने देश के कई शहरों में चांद की दरियाफ्त की लेकिन कहीं से भी चांद के दीदार की शहादत की सूचना नहीं मिली। इस दौरान ईद की नमाज के लिए कोविड प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन किया जाएगा। ईद की नमाज में पेश ए इमाम के अलावा सिर्फ पांच लोग ही मौजूद रहेंगे।
चांद पर आधारित है इस्लामिक कैलेंडर
इस्लामिक कैलेंडर चांद पर आधारित है। चांद के दिखाई देने पर ही ईद या प्रमुख त्योहार मनाए जाते हैं। रमजान के मुकद्दस माह की शुरूआत चांद के देखने से होता है और इसका समापन भी चांद के निकलने से होता है। रमजान के 29 या 30 दिनों के बाद ईद का चांद दिखता है।
शिया जामा मस्जिद के प्रवक्ता हाजी फरमान हैदर ने बताया कि पैगंबर मुहम्मद साहब के नेतृत्व में जंग-ए-बद्र में मुसलमानों की जीत हुई थी। जीत की खुशी में लोगों ने ईद मनाई थी और घरों में मीठे पकवान बनाए गए थे। इस प्रकार से ईद-उल-फि तर त्योहार का प्रारंभ जंग-ए-बद्र के बाद से ही हुआ था।
ईद-उल-फितर के दिन लोग अल्लाह का शुक्रिया अदा करते हैं। उनका मानना है कि उनकी ही रहमत से वे पूरे एक माह तक रमजान का उपवास रख पाते हैं। आज के दिन लोग अपनी कमाई का कुछ हिस्सा गरीबों में बांट देते हैं। उनको उपहार में कपड़े, मिठाई और भोजन आदि देते हैं।