इन पीपीई किट पर किसी की नजर नहीं जा रही हैं। जिस तरह से कोरोना का संक्रमण तेजी से फैलता जा रहा है, उसको देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की यह लापरवाही बड़ी घातक हो सकती है। ऐसा इसलिए कि कोविड हॉस्पिटल में वाराणसी, चंदौली और गाजीपुर के संक्रमित मरीजों का इलाज चल रहा है।
डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ भी यहां रोजाना ड्यूटी पर आ रहे हैं। हालत यह है कि कोविड हॉस्पिटल में जगह-जगह कोरोना संक्रमित मरीजों का इलाज करने के बाद पीपीई किट, मास्क, ग्लब्स खुले में फेंके गए हैं। ऐसा नहीं है कि हॉस्पिटल में कोई आ या जा नहीं रहा है। यहां विभागीय अधिकारी और अन्य लोग भी यहां ड्यूटी कर रहे हैं। लेकिन इस तरह की लापरवाही पर किसी की नजर नहीं जा रही है।
बीएचयू ट्रामा सेंटर मोर्चरी के सामने फेंक दी पीपीई किट
बीएचयू ट्रामा सेंटर में बुधवार को बड़ी लापरवाही देखने को मिली। यहां मोर्चरी के सामने किसी ने कोरोना मरीजों के इलाज में पहने जाने वाला पीपीई किट, ग्लब्स, मास्क फेंक दिया था। इधर से स्वास्थ्य कर्मचारी और अधिकारी भी आते जाते हैं लेकिन किसी ने इस तरफ ध्यान देना गंवारा नहीं किया। उधर इसकी जानकारी होने के बाद ट्रामा सेंटर प्रशासन में हड़कंप मच गया।
हालांकि पीपीई किट सहित अन्य सामान को किसने और क्यों फेंका इस बारे में अभी कोई जानकारी नहीं मिल पा रही है। लेकिन जिस तरह की लापरवाही है, उसको लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। इस बारे में पूछे जाने पर ट्रामा सेंटर के इंचार्ज प्रो. संजीव गुप्ता ने बताया कि तीन दिन पूर्व जिस मरीज की मौत हुई थी, उसके परिजनों को स्वास्थ्य विभाग की ओर से शव को अंतिम संस्कार के लिए ले जाने के लिए जो पीपीई किट दिया गया था, परिजन उसे बिना पहने ही फेंककर चले गए। बुधवार को जानकारी मिलने के बाद ही इसे हटवाया गया।
क्या है नियम कोरोना
कोविड-19 गाइडलाइन के मुताबिक संक्रमित मरीजों का इलाज करने के लिए पहने जाने वाले पीपीई किट, मास्क, ग्लब्स के प्रयोग के बाद उसे निर्धारित मानकों के अनुसार ही निस्तारित करना चाहिए। इधर उधर फेंके जाने से संक्रमण बढ़ने का खतरा रहता है।