हालांकि मुख्यालय से जारी इमेल में उन्हें निष्क्रियता के कारण हटाने को कारण बताया गया है, लेकिन इस बात को वह सिरे से नकार रहे हैं। उनका कहना है कि वह पार्टी के सभी कार्यक्रम में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते रहे हैं। 29 जनवरी को श्रीराम मंदिर निर्माण में उन्होंने समपर्ण धनराशि दी थी। इसको लेकर वह वरिष्ठ नेताओं के निशाने पर थे। उनसे बार-बार पूछा जा रहा था कि आरएसएस के माध्यम से उन्होंने धनराशि क्यों दी। उन्होंने कहा कि एक तरफ पार्टी की प्रदेश प्रभारी प्रियंका गांधी मौनी अमावस्या पर संगम में स्नान कर रही हैं और राहुल गांधी खुद को शिव भक्त बता रहे हैं। वहीं उन्हें मंदिर निर्माण के लिए चंदा देने के नाम पर पद से हटा दिया गया।