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Cochlear Implant: IMS BHU के डॉक्टरों ने जन्म से दिव्यांग दो बच्चों की जिंदगी में डाली शब्दों की खुशियां

Fri, 16 Sep 2022 08:35 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

आईएमएस बीएचयू के ईएनटी डिपार्टमेंट में डॉक्टरों ने जन्म से दिव्यांग दो बच्चों की जिंदगी में शब्दों की खुशियां डाली है। महामना कॉकलियर इंप्लांट के जरिए बोलने और सुनने की जन्मजात समस्या से निजात दिला दी है। 
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दो बच्चों का हुआ इम्प्लांट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मिर्जापुर के राजगढ़ की तीन वर्षीय रिया और झारखंड के हजारीबाग का साढ़े तीन वर्षीय अरहम अख्तर अब सामान्य बच्चों की तरह ही बोल और सुन सकेंगे। जन्म से ही दिव्यांग दोनों बच्चों को बीएचयू चिकित्सा विज्ञान संस्थान (आईएमएस बीएचयू) के नाक, कान और गला रोग विभाग के चिकित्सकों ने महामना कॉकलियर इंप्लांट के जरिए जन्मजात समस्या से निजात दिला दी है। 

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आईएमएस बीएचयू के ईएनटी डिपार्टमेंट में डॉ. विश्वंभर सिंह के नेतृत्व में जन्म के साथ बहरेपन की तुरंत पहचान करने वाला प्रोजेक्ट चल रहा है। ऐसे बच्चे, जिनके अंदर बोलने और सुनने की समस्या रहती है। अब महामना कॉकलियर इंप्लांट लगाने से उनकी यह समस्या दूर हो रही है। इसके प्रयोग से जहां बच्चे समय से बोल पाएंगे, वहीं सुनने की क्षमता भी समय से विकसित होगी।

जितनी जल्दी जांच, उतनी जल्दी इलाज
डॉ. सिंह का कहना है कि बच्चों की जितनी जल्दी जांच होगी, उतनी जल्दी इलाज हो जाएगा तो दिव्यांग (मूकबधिर) बच्चे सामान्य बच्चों की तरह सुन, समझ एवं बोल पाएंगे। प्रो. राजेश कुमार और डॉ. विश्वंभर की टीम की ओर से यह शल्य क्रिया एवं जांच पिछले कुछ वर्षों से चल रही है।

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इंप्लांट लगाने वाली टीम में चिकित्सक समेत 14 लोग

दो बच्चों में महामना कॉकलियर इंप्लांट नाक, कान, गला विभाग के आपरेशन थिएटर एवं टेलीमेडिसिन के सहयोग से किया गया। जिन बच्चों में कॉकलियर इंप्लांट लगा है, उनमें रिया (3) राजगढ़, मिर्जापुर और अरहम अखतर (3.5) हजारीबाग, झारखंड के हैं। इंप्लांट लगाने वाली टीम में डॉ. विश्वंभर सिंह के नेतृत्व में 14 चिकित्सक व नर्सिंग स्टाफ की टीम शामिल हैं।
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इसमें विशिष्ट सर्जन के तौर पर प्रो. राजेश विश्वकर्मा, उनकी पत्नी लीना ने बच्चों का ऑपरेशन किया। समय-समय पर होने वाले इस ऑपरेशन में स्थानीय करीब 50 चिकित्सक ऑनलाइन एवं ऑफलाइन जुड़ रहे हैं। साथ ही साथ प्रदेश एवं बाहर के लगभग 75 विशेषज्ञ भी जुड़ेंगे। 50 मेडिकल कॉलेज में सीधा प्रसारित किया जाएगा ताकि बड़े स्तर पर सभी विशेषज्ञ लाभान्वित हो सकें। 
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