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काशी में सीएम योगीः पहले दिन पंचक्रोशी यात्रा, आज कर रहे 'संपर्क फॉर समर्थन'

Sun, 10 Jun 2018 11:04 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,वाराणसी
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पद्यश्री प्रो. सरोज चुड़ामणि गोपाल जी के साथ सीएम योगी - फोटो : अमर उजाला
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 20 दिन बाद शनिवार शाम को दोबारा वाराणसी पहुंचे। पहले दिन उन्होंने मर्णिकर्णिका घाट से मौन व्रत लेकर नंगे पांव पंचक्रोशी परिक्रमा की तो वहीं रविवार सुबह से वो संपर्क फॉर समर्थन अभियान के तहत काशी की पांच विभूतियों से मिलने उनके घर पहुंच गए।
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सीएम योगी के वाराणसी प्रवास के दौरान पुलिस-प्रशासन चौकस है। सीएम योगी ने रविवार को पद्यश्री प्रो. सरोज चुड़ामणि गोपाल जी, काशी विद्यापीठ के प्रो. सुरेंद्र प्रताप सिंह,वरिष्ठ अधिवक्ता श्री राधेश्याम चौबे और ज्योतिषाचार्य चंद्रमौली उपाध्याय से मुलाकात की।


मुलाकात के दौरान सीएम योगी ने मोदी सरकार की चार साल की उपलब्धियों और जनोपयोगी कार्यों पर चर्चा की।  2019 के नए नारे साफ नीयत सही विकास से जुड़ी सरकार के कार्यों की पुस्तिका भी भेंट की। 
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yogi - फोटो : अमर उजाला
शनिवार को काशी केंद्र और राज्य सरकार की गतिविधियों को खास केंद्र बना रहा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ वाराणसी के मर्णिकर्णिका घाट से मौत व्रत लेकर नंगे पांव पंचक्रोशी परिक्रमा की शुरुआत की। उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने बाबा विश्वनाथ मंदिर में दर्शन के बाद प्रधानमंत्री के जनसंपर्क अभियान को आगे बढ़ाया। केंद्रीय राज्यमंत्री जनरल वीके सिंह ने भी शहर के प्रबुद्ध लोगों से मुलाकात कर केंद्र सरकार की उपलब्धियां बताईं। 

शाम 6.10 बजे सीएम योगी आदित्यनाथ ने मणिकर्णिका घाट से संकल्प लेने के बाद पंचक्रोशी परिक्रमा आरंभ की। काशीवासियों ने उनका डमरू बजाकर और जय घोष के साथ मुख्यमंत्री का स्वागत किया। 6:20 बजे सीएम चक्रपुष्करणी से काशी विश्वनाथ और षोडश विनायक के दर्शन के लिए निकल गए।

बाबा के दर्शन के उपरांत उन्होेंने व्यास पीठ की परिक्रमा कर पंचक्रोशी परिक्रमा का मौन व्रत धारण किया। इसके बाद सीएम बजड़े से अस्सी घाट होते हुए प्रथम पड़ाव की ओर निकल गए। गौरतलब है कि काशी में चल रहे विकास पर  मुख्यमंत्री की विशेष नजर है।

इसी के तहत उन्होंने पौराणिक पंचक्रोशी परिक्रमा मार्ग को विकसित करने के निर्देश दिए थे। मगर प्रशासन ने बदहाल मार्ग पर कोई खास ध्यान नहीं दिया। दो दिन पहले मुख्यमंत्री के परिक्रमा के फैसले की जानकारी के बाद आनन-फानन दिन-रात कार्य कराए जाने लगे। इसके अलावा अन्य परियोजनाओं के अधिकारी भी सब ठीक-ठाक और तेज करने में जुटे रहे।
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भगवान श्रीराम ने भी की थी पंचक्रोशी यात्रा

yogi - फोटो : अमर उजाला
पौराणिक मान्यता के अनुसार मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम चंद्र ने भी पंचक्रोशी यात्रा की थी। यात्रा के दौरान ही उन्होंने रामेश्वर में रामेश्वर महादेव को स्थापित किया था। 84 किलोमीटर की पंचक्रोशी यात्रा के दौरान 108 तीर्थस्थलों और मंदिरों में दर्शन पूजन का विधान है।

मणिकर्णिका घाट से आरंभ होने वाली यह यात्रा कंदवा, भीमचंडी, रामेश्वर, पांचोपंडवा और कपिल धारा से होते हुए वापस मणिकर्णिका घाट पहुंचकर विराम लेती है। गंगा स्नान करने के बाद विशेश्वर महादेव का दर्शन-पूजन और संकल्प के साथ तीर्थयात्री यात्रा पर निकलते हैं।

काशी विश्वनाथ मंदिर के महंत डॉ. कुलपति तिवारी ने बताया कि पंचक्रोशी यात्रा में तीर्थयात्री विश्वेश्वर भगवान के स्वरूप की परिक्रमा कर पुण्य कमाते हैं। मान्यता है कि मां पार्वती ने भी पंचक्र ोशी परिक्रमा की 
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