रक्षाबंधन को लेकर रोडवेज की ओर से तमाम दावे किए गए थे, लेकिन सभी दावे हवा हवाई साबित हुए। रक्षाबंधन के एक दिन पहले ही रोडवेज की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। शनिवार को कैंट रोडवेज बस स्टैंड यात्रियों की भीड़ ऐसी उमड़ी की बसें कम पड़ गईं। जबकि रोडवेज प्रशासन की ओर से दो दिन पहले दावा किया गया था कि यात्रियों की सुविधा के लिए 500 बसें उतारी जाएंगी।
कैंट रोडवेज पर यात्रियों के भीड़ से बसें कम पड़ गईं। जिससे यात्रियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। बसें स्टैंड में पहुंचते ही भर जा रहीं थीं। इससे तमाम यात्रियों को बसों में खड़े हो कर सफर करना पड़ा। रोडवेज बसों की कमी का प्राइवेट बस ऑपरेटरों ने भी जमकर फायदा उठाया। लगभग सभी रूटों पर प्राइवेट बसें पूरे दिन दौड़तीं रहीं। प्राइवेट बसों में भी भीड़ का कमोबेश यही हाल रहा।
सिटी बसें भी बदइंतजामी का शिकार
अपने दावे को फेल होते देख रोडवेज प्रशासन की ओर से दोपहर बाद सिटी बसों को भी उतारा गया, लेकिन जानकारी के अभाव में सिटी बसें खाली ही जा रहीं थीं। जबकि कैंट सहित अन्य बस स्टैंडों पर यात्रियों की भीड़ लगी रही। रोडवेज प्रशासन की बदइंतजामी का आलम यह था कि सिटी बसें अन्य जिलों की सेवा में लगाने के बाद उनपर सूचना के लिए बोर्ड तक का भी प्रबंध नहीं किया गया।
घंटों इंतजार के बाद भी नहीं मिली बस
कैंट रोडवेज परिसर में गोरखपुर, प्रयागराज, चंदौली, गाजीपुर, मिर्जापुर, आजमगढ़, जौनपुर और बलिया के लिए जाने वाले यात्री बसों के परेशान रहे। बसें मिलीं भी तो पांच मिनट में भर गईं। इससे कई यात्री बस में खड़े होकर सफर करने को मजबूर हो गए। परिवार और बच्चों के साथ लोगों को घंटों तक बसों का इंतजार करना पड़ा।
कैंट रोडवेज में हैं 521 बसें
कैंट रोडवेज के पास वर्तमान में 521 बसें हैं। इसमें परिवहन निगम की 471 और 50 अनुबंधित बसें हैं। जबकि सिटी सेवा के तहत 130 बसें हैं। बृहस्पतिवार को रोडवेज प्रशासन ने दावा किया था कि रक्षाबंधन के मद्देनजर इस बार वाराणसी समेत आसपास के जिलों में यात्रा के लिए रोडवेज की 500 बसें चलाई जाएंगी।
रक्षाबंधन को देखते हुए यात्रियों की सुविधा के अनुसार बसें लगाई जा रही हैं। बसें कम पड़ने पर सिटी बसों को भी लगाया गया है। किसी भी यात्री को दिक्कत न हो इसका ख्याल रखा जा रहा है।
- कमलाकांत तिवारी, क्षेत्रीय प्रबंधक रोडवेज