रवींद्र ने स्थानीय लोगों के साथ गर्ग को बाहर निकालने की कोशिश की लेकिन वह गड्ढे में धंसता ही चला गया। मौके पर पहुंचे एनडीआरएफ के जवानों ने जेसीबी मशीन से दलदल के किनारे लगभग तीन फीट गहरी खुदाई की। इसके बाद दलदल के मलबे को किनारे कर दबे गर्ग को बाहर निकाला। कैंट पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
कलेजे के टुकड़े की मौत देख बेसुध हुआ पिता
रवींद्र और उनकी पत्नी शाम को धनतेरस की पूजापाठ की तैयारी में थे। उससे पहले ही उनके साथ ऐसी हृदयविदारक घटना हुई, जिसे वह जीवन भर नहीं भूल पाएंगे। अपनी आंखों के सामने कलेजे के टुकड़े को दलदल में धंसता देख रवींद्र की हालत बेसुधों जैसी थी। क्षेत्रीय लोग बड़ी ही मुश्किल से उन्हें पकड़े हुए थे। वह बार-बार खुद को कोस रहे थे कि आखिरकार गर्ग को पकड़ने क्यों निकले। शायद वह घर के बाहर खेलता रहता तो उसकी जान नहीं जाती।