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पिता की आंखों के सामने दलदल में समा गया घर का चिराग, गुस्साए ग्रामीणों ने लगाया जाम

Fri, 25 Oct 2019 05:37 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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आठ साल के मासूम की दलदल में फंसकर हुई मौत - फोटो : अमर उजाला
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दिवाली से दो दिन पहले शुक्रवार को डगरहवा घाट निवासी रवींद्र कुमार के घर का चिराग बुझ गया। रवींद्र का इकलौता बेटा गर्ग (8) घर से कुछ दूरी पर दलदल में फंस गया और नीचे धंसता ही चला गया। स्थानीय लोगों की सूचना के बावजूद भी पुलिस एक घंटे तक मौके पर नहीं पहुंची और गर्ग की मौत हो गई। 

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गुस्साए लोगों ने हुकुलगंज में जाम लगाकर पुलिस और प्रशासन विरोधी नारेबाजी शुरू कर दी। सीओ कैंट ने आश्वस्त किया कि घटना के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होगी, तब जाकर सभी शांत हुए। 

पुलिस की सूचना पर आए 11 एनडीआरएफ के जवानों ने लगभग एक घंटे की मशक्कत के बाद जेसीबी की मदद से बच्चे का शव बाहर निकाला। घटना को लेकर परिजनों में कोहराम मचा हुआ है।
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कैंट थाना के हुकुलगंज क्षेत्र में वरुणा किनारे स्थित डगरहवा घाट निवासी रवींद्र कुमार मेडिकल स्टोर में काम करते हैं। शाम के समय रवींद्र और उनकी पत्नी अनीता घर की साफ-सफाई कर रहे थे। उनकी बेटी अरघ्या (4) और बेटा गर्ग (8) खेल रहे थे। इसी दौरान गर्ग खेलते हुए बाहर निकल गया। रवींद्र गर्ग को पकड़ने के लिए घर से बाहर निकले तो वह उन्हें देख भागने लगा। 

रवींद्र के घर से लगभग डेढ़ सौ मीटर की दूरी पर मवेशियों का अवशेष दबाने के लिए विशालकाय गड्ढा खोदा गया था, जो बाढ़ के बाद दलदल हो गया है। रवींद्र को देख गर्ग भागा और दलदल में फंस गया। 

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रवींद्र ने स्थानीय लोगों के साथ गर्ग को बाहर निकालने की कोशिश की लेकिन वह गड्ढे में धंसता ही चला गया। मौके पर पहुंचे एनडीआरएफ के जवानों ने जेसीबी मशीन से दलदल के किनारे लगभग तीन फीट गहरी खुदाई की। इसके बाद दलदल के मलबे को किनारे कर दबे गर्ग को बाहर निकाला। कैंट पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

कलेजे के टुकड़े की मौत देख बेसुध हुआ पिता
रवींद्र और उनकी पत्नी शाम को धनतेरस की पूजापाठ की तैयारी में थे। उससे पहले ही उनके साथ ऐसी हृदयविदारक घटना हुई, जिसे वह जीवन भर नहीं भूल पाएंगे। अपनी आंखों के सामने कलेजे के टुकड़े को दलदल में धंसता देख रवींद्र की हालत बेसुधों जैसी थी। क्षेत्रीय लोग बड़ी ही मुश्किल से उन्हें पकड़े हुए थे। वह बार-बार खुद को कोस रहे थे कि आखिरकार गर्ग को पकड़ने क्यों निकले। शायद वह घर के बाहर खेलता रहता तो उसकी जान नहीं जाती। 
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