कन्या स्वरूपों का पूजन करके उनको भोग अर्पित किया गया। कन्या भोज के लिए घरों में तरह-तरह के पकवान बनाए गए। चना, हलवा, पूड़ी और दही का भोग अर्पित किया गया। भोज के उपरांत कन्याओं को दक्षिणा और उपहार देकर विदाई दी गई।
पुराणों के अनुसार महत्व
देवी सहज ही प्रसन्न होकर भक्तों को सर्व सिद्धि प्रदान करती हैं। इसलिए शास्त्रों में देवी को सिद्धिदात्री नाम से पुकारा गया। शिव महापुराण, ब्रह्मवैवर्त पुराण और देवी पुराण के अनुसार भगवान शिव को भी समस्त सिद्धियां माता सिद्धिदात्री की कृपा से ही प्राप्त हुई थीं। दूसरी तरफ नवरात्र के अंतिम दिन दुर्गाकुंड स्थित दुर्गामंदिर में भक्तों की भारी भीड़ रही। मंदिर खुलने के पहले से लगी कतार चढ़ते दिन के साथ बढ़ती जा रही है।