जमीन की नापी कराते संतोष मूरत सिंह
- फोटो : अमर उजाला
संतोष के मां बाप नहीं रहे और वह तभी से ‘मैं जिंदा हूं’ बताकर संघर्ष कर रहे हैं। लोग उन्हें डेडमैन के नाम से जानते हैं। वहीं, यह फिल्म उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के खलीलाबाद में रहने वाले लाल बिहारी पर बनाई गई है। दरअसल, लाल बिहारी 1975 में जब एक बैंक लोन का आवेदन देने राजस्व विभाग पहुंचे, तो पता चला कि दफ्तर के कागजों में वह मर चुके हैं। उनकी सारी प्रॉपर्टी घूस लेकर उनके रिश्तेदारों के नाम कर दी गई थी। यहीं से लाल बिहारी की लड़ाई शुरू हुई और उन्होंने 20 साल बाद उन्हें इंसाफ मिला।