कोरोना की दूसरी लहर में संक्रमण पर नियंत्रण के लिए भले ही काशी मॉडल को पूरे देश में सराहा जा रहा है, लेकिन टीकाकरण के मामले में टीके की किल्लत, लचर प्रशासनिक रवैया समते कई अन्य वजहों से अभियान कमजोर होता दिख रहा है। जिस तरह से अगस्त-सितंबर तक तीसरी लहर की संभावना जताई जा रही है, उसके मुकाबले जिले में 18 साल से ऊपर के करीब 28 लाख लोगों को टीका लगाया जाना है, लेकिन 16 जनवरी से शुरू टीकाकरण अभियान में जिले में अब तक करीब सात महीने में केवल 30 फीसदी (86,3057) लोगों का ही टीकाकरण हो सका है। अगर जल्द ही टीकाकरण का संकट दूर नहीं हुआ तो परेशानी बढ़ सकती है।
शुरुआती दिनों में स्लॉट न मिल रहे थे। साथ ही लोगों में टीकाकरण संबंधी भ्रांतियां होने के कारण लोग केंद्रों तक नहीं पहुंच रहे थे। धीरे-धीरे जब स्थितियां बदलने लगीं और लोग टीका लगवाने केंद्रों पर पहुंचने लगे तो टीके की किल्लत होने लगी। टीका लगवाने के प्रति लोगों में बढ़े उत्साह का ही परिणाम है कि कई केंद्रों पर सुबह से ही लाइन लग जा रही है और मारामारी जैसे हालात हो रहे हैं। जिसके कारण पुलिस तैनात करनी पड़ रही है।
टीके की संकट की वजह से सबसे अधिक परेशानी दूसरी डोज लगवाने वालों को हो रही है। इसमें पहली डोज लगाने के बाद लोगों के मोबाइल पर दूसरी डोज लगाने का मैसेज आ रहा है, लेकिन उन्हें टीका नहीं लग पा रहा है। इस वजह से लोगों को हर दिन लौटना पड़ रहा है। आंकड़ों की बात करें तो अब तक कुल 8,63,057 लोगों के टीकाकरण में 1,54,512 लोगों को दूसरी डोज, जबकि 7,08,545 लोगों ने पहली डोज लगवाई है।