प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गांव वडनगर में मिले पुरावशेषों पर बीएचयू के छात्र शोध भी कर सकेंगे। इसके लिए विश्वविद्यालय के प्राचीन इतिहास विभाग और आईआईटी गांधीनगर सहित अन्य शिक्षण संस्थानों के बीच एमओयू की तैयारी चल रही है। इस जगह की खासियत यह है कि यहां एक दो नहीं बल्कि छोटे बड़े कुल 40 हजार पुरावशेष हैं।
वडनगर में 18 से 20 मई तक चलने वाली इंटरनेशनल कांफ्रेंस में शामिल होने वाली 27 सदस्यीय टीम में शामिल छात्रों के साथ ही अन्य छात्रों को इसका लाभ मिलेगा। शनिवार को विभागाध्यक्ष प्रो. सुमन जैन ने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि कांफ्रेंस के लिए कुल 9 पेपर प्रेजेंटेशन के लिए भेजे गए थे, जिसमें शोध छात्रों के छह पेपर चयनित हुए हैं।
विश्वविद्यालय में यह पहली बार हो रहा है जब किसी कांफ्रेंस में एक साथ 15 छात्र और 12 शोध छात्र शामिल हैं। विभागाध्यक्ष ने बताया कि शिक्षकों की टीम पैनल डिस्कशन में भाग लेेगी, जबकि शोध छात्र पोस्टर प्रदर्शनी में भाग लेंगे। खास बात यह है कि इतिहास से जुड़े विषयों और वडनगर में मिलने वाले पुरावशेषों पर शोध के लिए शिक्षण संस्थानों और विश्वविद्यालयों के साथ होेने वाला समझौता बहुत उपयोगी होगा। संगोष्ठी में देश विदेश के 20 विश्वविद्यालयों के करीब 2000 प्रतिभागी शामिल होंगे। बीएचयू की टीम 17 मई की शाम को रवाना होगी।
टीम में शामिल हैं ये सदस्य
बीएचयू की टीम में प्रो, सुमन जैन (नोडल अधिकारी), प्रो. पीके श्रीवास्तव, प्रो. ओंकार नाथ सिंह, प्रो. ऊषा रानी तिवारी, डॉ. शीतल राणा, डॉ. अशोक कुमार सिंह, डॉ. विनय कुमार, डॉ. अमित कुमार उपाध्याय, डॉ. विकास कुमार सिंह, डॉ. प्रियंका सिंह, डॉ. उमेश कुमार सिंह, डॉ. विनोद कुमार जायसवाल एवं डॉ. विराग गोपाल सोनटक्के शामिल हैं। इसके अलावा शोध छात्रों में डॉ. रविशंकर, डॉ. उश्रम कुमार द्विवेदी, अनिल कुमार, प्रियंका, विक्की कुमारी, परमदीप पटेल, राहुल कुमार भारती, संध्या विश्वकर्मा, जवा मधुर, प्रतिभा द्विवेदी, देवेन्द्र कुमार एवं अंशुमन माथुर भी टीम का हिस्सा होंगे।