पोस्टर विवाद मामले में गठित जांच कमेटी ने अपनी जांच शुरू कर दी है। इस बावत पूछे जाने पर उर्दू विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. आफताब अहमद आफाकी का कहना है कि जांच कमेटी को पूरी सच्चाई बताएंगे। पोस्टर पर विवाद की जानकारी के बाद उस पर तुरंत महामना की तस्वीर भी लगवा दी गई। जहां तक कुलगीत न गाए जाने की बात उठी है तो लोगों को यह जानना चाहिए कि उर्दू विभाग भी विश्वविद्यालय का अंग है। हर बार की तरह मंगलवार को भी कुलगीत गाया गया।
प्रो. आफताब अहमद आफाकी ने यह भी कहा कि अल्लामा इकबाल का जन्म दिन 9 नवंबर 1877 को हुआ था। उनके जन्म दिन को उर्दू दिवस के रुप में मनाया जाता है। इसका आयोजन हर साल होता है। प्रो. आफाकी ने कहा कि इकबाल पर विवाद इतना क्यों हो रहा है यह समझ से परे हैं।
यह भी जानना जरूरी है कि वह पैदा भारत में हुए और उनकी मौत भी यहीं हुई। आजादी और विभाजन से पहले ही 1938 में अविभाजित लाहौर में ही उनका इंतकाल हो गया था। आज भी मध्य प्रदेश सरकार की ओर से हर साल साहित्य के क्षेत्र में साहित्यकारों को अल्लामा इकबाल सम्मान दिया जाता है।
विभागाध्यक्ष और छात्रों से पूछताछ कर सकती है जांच कमेटी
विश्वविद्यालय में नौ नवंबर को उर्दू विभाग की ओर से आयोजित वेबिनार पर बवाल मचा है। इस मामले में विश्वविद्यालय की ओर से अंग्रेजी विभागाध्यक्ष प्रो. केएम पांडेय की अध्यक्षता वाली जांच कमेटी ने जांच शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि मामले में उर्दू विभागाध्यक्ष का बयान दर्ज करने के साथ ही पोस्टर तैयार करने वाले छात्रों से भी जांच कमेटी पूछताछ कर सकती है। इधर, बुधवार को परिसर में पोस्टर विवाद को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं होती रहीं। अब सभी को जांच कमेटी की रिपोर्ट का इंतजार है।
मालवीय प्रतिमा पर मार्ल्यापण, कुलगीत का वीडियो ट्वीट
उर्दू विभाग में वेबिनार के पोस्टर पर महामना की तस्वीर न होने के विवाद के बाद ही वेबिनार में कुलगीत न गाए जाने पर भी छात्रों ने सवाल उठाया है। इसके बाद कला संकाय प्रमुख के टिवटर हैंडल से उर्दू विभाग की ओर से आयोजित वेबिनार का एक मिनट का वीडियो भी अपलोड किया गया। इसमें उर्दू विभागाध्यक्ष प्रो. आफताब अहमद आफाकी सहित अन्य अतिथियों ने महामना की प्रतिमा पर माल्यार्पण करने के साथ ही विद्यार्थियों द्वारा कुलगीत गाते दिख रहे हैं।
उर्दू विभाग में पाठ्यक्रम में पढ़ाए जाते हैं इकबाल
उर्दू विभाग में जिस अल्लामा इकबाल के पोस्टर को लेकर विवाद शुरू हुआ, उनके बारे में छात्र पाठ्यक्रम में पढ़ते हैं। उर्दू विभागाध्यक्ष ने बताया कि बीए और एमए के पाठ्यक्रम में छात्र इकबाल को पढ़ते हैं, ऐसे में उर्दू के शायर अल्लामा इकबाल को लेकर जिस तरह से जो लोग आपत्ति जता रहे हैं, उस पर कुछ भी कहना ठीक नहीं है। केवल उर्दू ही नहीं हिंदी विभाग में भी उर्दू के इस शायर के बारे में पढ़ाई होती है।