निलंबित सीओ अमरेश सिंह बघेल
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सांसद के पिता भरत सिंह के शिकायती पत्र पर जांच करते हुए अपनी रिपोर्ट में सीओ अमरेश ने दुष्कर्म पीड़िता और उसके गवाह साथी को मऊ सदर विधायक माफिया मुख्तार अंसारी के गुर्गे अंगद राय के इशारे पर अतुल राय को फंसाने की बात कही थी। सोनभद्र जेल में बंद अंगद राय के मोबाइल कॉल डिटेल को भी सार्वजनिक किया था।
यहां बता दें कि बलिया की रहने वाली युवती और यूपी कालेज की पूर्व छात्रा ने मई 2019 में अतुल राय के खिलाफ लंका थाने में दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज कराया था। इसके बाद 22 जून 2019 को पुलिस को चकमा देते हुए अतुल राय ने कोर्ट में आत्मसमर्पण किया था। मौजूदा समय में अतुल राय प्रयागराज के नैनी सेंट्रल जेल में बंद हैं।
कमिश्नरेट बनने के बाद आईपीएस अधिकारियों की फौज शहर में उतर गई, बावजूद इस मामले में किसी अधिकारी ने तल्लीनता से संज्ञान नहीं लिया। क्या रिपोर्ट लग रही, किसकी जांच कौन कर रहा, दुष्कर्म पीड़िता और अतुल राय मामले की निगरानी में हद दर्जे की लापरवाही बरती गई।
दुष्कर्म पीड़िता यह आरोप लगाती रही कि कमिश्नरेट बनने के बाद पुलिस उच्चाधिकारियों ने फोन नंबर तक ब्लाक कर दिया था। पीड़िता के आत्मदाह करने से पहले तक कमिश्नरेट पुलिस के अधिकारी उनको सुनने को भी तैयार नहीं थे।
अतुल राय प्रकरण मेें वाराणसी में तैनात एसपी सिटी विकास चंद्र त्रिपाठी की भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही है, जिन्हें निलंबित कर दिया गया। दरअसल, सांसद अतुल राय के पिता भरत सिंह ने शिकायती पत्र एसपी सिटी विकास चंद्र त्रिपाठी को सौंपा था, जिसे एसपी सिटी ने तत्कालीन सीओ भेलूपुर अमरेश सिंह बघेल को जांच के लिए आगे बढ़ाया था।
जांच पूरी करने के बाद आठ अगस्त 2020 को अमरेश सिंह बघेल ने 11 पन्ने की रिपोर्ट एसपी सिटी को सौंपी थी। इस मामले की जांच रिपोर्ट विकास चंद्र त्रिपाठी ने अपने पास रखी, हालांकि बाद में दुष्कर्म पीड़िता ने उच्चाधिकारियों से गुहार लगाई तो अमरेश सिंह बघेल दिसंबर 2020 में निलंबित कर दिए गए।
अदालत में आरोपी सीओ अमरेश सिंह बघेल का न्यायिक रिमांड बनाए जाने का अधिवक्ता मनोज यादव ने विरोध किया। कहा कि एक ही अपराध में पहले दिल्ली फिर हजरतगंज अब बनारस में मुकदमा दर्ज किया जाना विधि विरुद्ध है। आरोपी निर्दोष है। इस प्रकरण की जांच एसआईटी पहले से ही कर रही है। उधर, एपीओ अनुराग त्रिपाठी की दलील थी कि आरोपी के खिलाफ रिमांड बनाने का पर्याप्त आधार है।
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायिक रिमांड बनाकर बघेल को जेल भेजा। वहीं कचहरी में अधिवक्ताओं और अन्य मीडिया कर्मियों को अमरेश बघेल के पास जाने से रोका गया। इसके लेकर अधिवक्ताओं ने काफी हो हल्ला भी मचाया।
अंतत: पेशी के बाद तगड़ी सुरक्षा के दौरान वाहन से बघेल को जिला जेल भेज दिया गया। पुलिस आयुक्त ए सतीश गणेश के गोपनीय पत्र और पुलिस उपायुक्त मुख्यालय की जांच आख्या के बाद लंका थाना प्रभारी निरीक्षक महेश पांडेय ने बघेल के खिलाफ बुधवार रात मुकदमा दर्ज किया था।