पुलिस सूत्रों के अनुसार एनआईए की टीम सबसे पहले अलसुबह साढ़े चार बजे आदमपुरा थाना अंतर्गत पठानी टोला धमकी। यहां से एक युवक को उठाया, जिसका मोहल्ले में बहुत कम आना जाना था। उक्त युवक को उठाए जाने के बाद आदमपुरा थाना अंतर्गत ही छित्तनपुरा से एक युवक को उठाया।
पांच बजे के बाद जैतपुरा के कच्चीबाग में टीम पहुंची और युवक को हिरासत में लिया। एनआईए की टीम ने तीनों परिवार के लोगों से उनका नाम, पता और मोबाइल नंबर लेने के साथ ही रिश्तेदारों के बारे में जानकारियां जुटाई। पूछताछ में यह जानने की कोशिश की क्या कभी कोई सदस्य देश से बाहर गया।
कच्चीबाग में साड़ी और कपड़े की पुश्तैनी दुकान संभालने वाले युवक और छित्तनपुरा सहित पठानीटोला के रहने वाले युवक के एंड्रायड मोबाइल को एनआईए ने जब्त किया। मोहल्ले के लोगों ने पुलिस की पूछताछ में बताया कि पठानीटोला में रहने वाला युवक किसी से बात नहीं करता था। बहुत कम दिखता भी था।
सीएए-एनआरसी के विरोध में आया था पीएफआई का नाम
तीन साल पूर्व नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में शहर का माहौल बिगाड़ने में पापुलर फ्रंट इंडिया के सदस्यों की भूमिका अहम थी। बेनिया और बजरडीहा में हुए बवाल के दौरान 40 से अधिक लोगों को चिन्हित किया गया था, जो पीएफआई से जुड़े हुए बताए गए थे। बजरडीहा में बवाल के दौरान पत्थरबाजी और भगदड़ में एक बच्चे की मौत हो गई थी। कमिश्नरेट पुलिस अधिकारियों के अनुसार प्रतिबंधित संगठन सिमी पर सख्ती के बाद उसके कई पदाधिकारी और सदस्य पीएफआई में शामिल हो गए।
पीएफआई की स्थापना 2006 में हुई थी। केरल से शुरू हुआ यह संगठन मौजूदा समय में देश के विभिन्न राज्यों में सक्रिय है। बनारस में भी उसके 80 से अधिक कार्यकर्ता तीन साल पहले सीएए-एनआरसी बवाल के समय चिन्हित हुए थे।
क्षेत्र में घुले मिले थे पकड़े गए पीएफआई के संदिग्ध सदस्य
एनआईए और एटीएस के द्वारा पकड़े गए पीएफआई के तीनों संदिग्ध सदस्य अपने इलाके में लोगों से काफी घुले मिले थे। स्थानीय लोगों को जब पता चला कि वह टेरर फंडिंग करने के मामले में लिप्त संगठन के बड़े नेताओं से सीधे संपर्क में हैं तो सभी के होश उड़ गए। वहीं पठानी टोला, छित्तनपुरा, हनुमान फाटक, कोयलाबाजार और जैतपुरा के कच्ची बाग सहित आसपास के इलाकों में बृहस्पतिवार देर शाम तक गलियों से लगायत सड़क तक लोगों में तरह तरह की चर्चाएं हो रही थी।
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सुबह धमकी एनआईए और एटीएस की टीम, लोकल पुलिस को नहीं लगी भनक
एक तरफ देश के 13 राज्यों सहित वाराणसी में एनआईए, ईडी और एटीएस की आतंकवाद के लिए फंडिंग करने वाले संगठन के रूप में चिह्नित पीएफआई के ठिकानों और उससे जुड़े लोगों को पकड़ने में लगी हुई थी तो दूसरी ओर इस पूरे प्रकरण से वाराणसी की लोकल पुलिस और एलआईयू पूरी तरह से अंजान थी। दोपहर तक दोनों थाना क्षेत्रों में एलआईयू सहित अन्य लोकल जांच एजेंसियां पकड़े गए युवकों के बारे में जानकारी जुटा रही थी।