शिव की नगरी काशी अब पूरी तरह से शक्ति की आराधना में तल्लीन हो चुकी है। सोमवार को शारदीय नवरात्र की पंचमी और षष्ठी का मान होने के कारण श्रद्धालुओं ने स्कंद माता और मां कात्यायनी के दरबार में हाजिरी लगाई। श्रद्धालुओं ने स्कंदमाता से मोक्ष और मां कात्यायनी से आत्मज्ञान व पापनाश करने की कामना की। शहर के सभी दुर्गा मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।
सोमवार को जैतपुरा स्थित मां बागेश्वरी देवी के मंदिर में मां जगदंबा के पंचम स्वरूप के दर्शन के लिए भक्तों की लंबी कतार लगी रही। भक्तों ने माता की सविधि आराधना कर देवी के दरबार में सुख-शांति की कामना की। परिसर में देवी के जयकारे गूंजते रहे। पूरे मंदिर परिसर को गुड़हल, गेंदा और गुलाब के फूलों से सजाया गया था। भोर में पंचामृत स्नान व शृंगार के बाद पट खुलते ही भक्त बारी-बारी से देवी के दरबार में हाजिरी लगाने लगे।
महिलाएं नारियल, चुनरी के साथ लाइन में लगी थीं। देर रात तक मां के दर्शन का सिलसिला चलता रहा। मंदिर में पुत्र को गोद में लिए देवी स्कंद माता के दयालु स्वरूप को निहार कर भक्त धन्य हो उठे। मां स्कंदमाता बुद्धिदाता हैं, इसलिए मां के दरबार में बच्चों की संख्या भी खूब रही। देवी के इस स्वरूप की आराधना से व्यक्ति की संपूर्ण मनोकामना पूर्ण होती हैं और मोक्ष का मार्ग भी सुलभ हो जाता है।
धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की कामना
भक्तों ने मां कात्यायनी के दर्शन कर धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की कामना की। सिंधिया घाट स्थित मां कात्यायनी के दर्शन पूजन केलिए सुबह से ही भक्तों की कतार लग गई। भोर में मंगला आरती के बाद माता का विधि-विधान से भव्य शृंगार किया गया। मंदिर परिसर को फूलों से सजाया गया। इसके बाद मंदिर आम भक्तों के लिए खोल दिया गया। भक्तों ने माता को माला-फूल, नारियल और चुनरी का प्रसाद अर्पित किया।
कन्याओं के विवाह की बाधा होती है दूर
माता का व्रत और उनकी पूजा करने से कुंवारी कन्याओं के विवाह में आने वाली बाधा दूर होती है। मां के इस रूप का पूजन-अर्चन करने से भक्तों के पाप का नाश होता है। साथ ही मां आत्मज्ञान प्रदान करती हैं। काशी के अलावा वृंदावन में भी माता अधिष्ठात्री देवी हैं। माना जाता है कि भगवान कृष्ण को पति के रूप में पाने के लिए गोपियों ने कात्यायनी व्रत रखा था। इसी तरह अन्य देवी मंदिरों में भी भक्तों की भीड़ लगी रही।
मां काली की महाआरती आज
शारदीय नवरात्र की सप्तमी पर भोजूबीर पंचक्रोशी मार्ग पर स्थित मां दक्षिणेश्वरी काली का महानिशा पूजन एवं कालरात्रि दर्शन 12 अक्तूबर को शाम चार बजे से होगा। सामाजिक दूरी का पालन करते हुए मास्क लगाकर भक्तों को दर्शन कराया जाएगा। यह जानकारी व्यवस्थापक राजेश गिरी ने दी।