सपा के एमएलसी शतरुद्र प्रकाश ने गृहकर के बिलों में गड़बड़ी का होने का आरोप लगाया है। कहा है कि जापान की जायका कंपनी की ओर से शहर के भवनों के कराए गए जीआई सर्वे में कई गड़बड़ियां सामने आई हैं। सर्वे में 40-50 साल पहले बने भवनों को 20 साल पुराना दिखाकर वार्षिक मूल्यांकन में 32.5 फीसदी की छूट दी गई है। जबकि नगर निगम अधिनियम की धारा के अनुसार, 20 वर्ष से अधिक पुराने मकानों को 40 फीसदी छूट देने का प्रावधान है। इससे भवन स्वामियों को अधिक बिलों का भुगतान करना पड़ रहा है।
एमएलसी ने नगर आयुक्त प्रणय सिंह से इस मनमानी को रोकने और गृहकर की गड़बड़ बिल को दुरुस्त कराने की मांग की है। कहा कि दस वर्ष तक के पुराने घरों पर 25.5 प्रतिशत तक की छूट दी गई है। जीआई सर्वे में बिल की गड़बड़ी के साथ ही भवन स्वामियों के नाम में भी त्रुटियां हैं। मास्टर प्लान में सिगरा-महमूरगंज मार्ग की चौड़ाई 12 मीटर है और हाउस टैक्स के बिल मेें 12-24 मीटर चौड़ा बताया गया है। इसके चलते 0.8 रुपये वर्ग फीट की जगह न्यूनतम मासिक किराए की दर 1.4 रुपये वर्ग फीट के हिसाब से वसूली जा रही है।