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अहमदाबाद की कंपनी करेगी काशी विश्वनाथ धाम का निर्माण, लगेंगे इतने करोड़

Sat, 28 Dec 2019 04:37 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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काशी विश्वनाथ धाम - फोटो : अमर उजाला
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पीएम मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट अब 18 महीने में जनता के सामने होगा। शुक्रवार को धाम के निर्माण के लिए अहमदाबाद की कंपनी पीएसपी के नाम पर मुहर लग गई। फाइनेंशियल बिड में पीएसपी ने 339 करोड़ रुपये का प्रस्ताव दिया था। दिल्ली की कंपनी शापूर्जी की बिड 422 करोड़ के मुकाबले कम कीमत होने के कारण पीएसपी का चयन किया गया है। विश्वनाथ धाम के लिए पहले से तय कंसल्टेंसी कंपनी एचसीपी भी अहमदाबाद की ही है।

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काशी विश्वनाथ धाम के सुंदरीकरण व विस्तारीकरण परियोजना का काम 15 जनवरी से आरंभ हो जाएगा। काशी विश्वनाथ मंदिर के सीईओ विशाल सिंह ने बताया कि फाइनेंशियल बिड खुलने पर अहमदाबाद की पीएसपी का 339 करोड़ तथा शापूर्जी का 422 करोड़ का प्रस्ताव था। लागत कम होने के कारण पीएसपी को चयनित किया गया है। कंपनी के साथ सभी दस्तावेजों की प्रक्रिया दस दिन में पूरी हो जाएगी। 18 महीने के अंदर बाबा का धाम बनकर तैयार हो जाएगा।

धाम के निर्माण के लिए पीडब्ल्यूडी ने नवंबर में टेंडर जारी किया था। 12 दिसंबर को प्री-बिड मीटिंग में देश की चार कंपनियों ने भाग लिया, लेकिन टेंडर में शापूर्जी व पीएसपी इंफ्रास्ट्रक्चर ही शामिल हुईं। टेंडर खुलने के बाद करीब हफ्ते भर चले तकनीकी मूल्यांकन में दोनों कंपनियों के पास होने पर वित्तीय मूल्यांकन किया गया।

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सरकार ने दी थी 320 करोड़ के डीपीआर को मंजूरी
50 हजार वर्ग मीटर में प्रस्तावित कॉरिडोर के लिए करीब तीन सौ मकान खरीद कर ध्वस्त किए जा चुके हैं। इस पर सरकार ने 300 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। कॉरिडोर के निर्माण के लिए योगी सरकार ने 320 करोड़ के डीपीआर को मंजूरी दी थी, लेकिन स्वीकृत किए गए टेंडर में धनराशि बढ़कर 339 करोड़ हो गई है।

आनंद कानन में होगा रूद्र वन
विश्वनाथ कॉरिडोर में आने वालों को काशी नगरी के धार्मिक और सांस्कृतिक स्वरूप के दर्शन तो होंगे ही, आनंद कानन और रूद्र वन की परिकल्पना भी साकार होगी। इस लिहाज से कॉरिडोर एरिया में सिर्फ 60 फीसदी क्षेत्र में निर्माण होगा बाकि 40 फीसदी में वन क्षेत्र होगा। रूद्र वन में रुद्राक्ष के 350 से ज्यादा पौधे लगाए जाने की योजना है। धार्मिक और पौराणिक स्वरूप को प्रदर्शित करने के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। कल्चरल सेंटर, वैदिक केंद्र, टूरिस्ट फैसिलिटेशन सेंटर, सिटी म्यूजियम, जप-तप भवन, भोगशाला, मोक्ष भवन और दर्शनार्थी सुविधा केंद्र अधिकतम दो मंजिला ही बनेंगे।
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