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सत्ता और शासन के खिलाफ भरी हुंकार

Mon, 30 May 2016 01:41 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
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सारनाथ के हृदयपुर में रविवार को किसानों की महापंचायत को संबोधित करतीं सांसद अनुप्रिया पटेल। 
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चिलचिलाती धूप में हुंकार भरते हजारों किसान। बीच-बीच में अधिग्रहीत जमीन के पूरे मुआवजे की मांग को लेकर हवा में लहराती किसानों की मुट्ठियां इस बात की गवाही दे रही थी कि किसानों ने तय कर लिया है चाहे किसी से भी टकराना पड़े, वे अपनी मांग से पीछे नहीं हटेंगे। मौका था रिंग रोड के लिए अधिग्रहीत की गई जमीन की जद में आए 28 गांवों के किसानों की महापंचायत का। इस मौके पर सियासी दलों के नुमाइंदों ने विकास के नाम पर आंदोलन न करने की नसीहत दी, जबकि किसानों ने मुआवजे के सवाल पर सत्ता और प्रशासन के खिलाफ नारा भी बुलंद किया।
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हृदयपुर में हुई किसान महापंचायत में दोपहर से ही विभिन्न गांवों से रैलियों का आना शुरू हो गया था। जोश से लबरेज किसान नारे लगाते हुए सभा स्थल पर पहुंचे। किसान महारैली के मंच पर धर्म, जाति और पार्टी की सारी दीवारें टूट गईं। जहां सभी प्रमुख पार्टियों के नेताआें ने मंच साझा किया तो वहीं किसानों की मांग को जायज बताते हुए पूरे समर्थन का आश्वासन भी दिया। प्रभावित किसान परिवारों की महिलाएं दोपहर बाद कार्यक्रम स्थल पर पहुंच गई थी और कार्यक्रम समाप्त होने तक उन्होंने तालियों और नारों से मांगों का समर्थन किया।


महापंचायत में सुरक्षा के मद्देनजर दो महिला सहित सात सब इंस्पेक्टर, 12 कांस्टेबल, पांच महिला कांस्टेबल, एक फायर ब्रिगेड, थाना पुलिस और एक प्लाटून पीएसी मौजूद रही। वाजिदपुर, प्रतापपट्टी, सिकंदरपुर, इदिलपुर, आशापुर, भगवानपुर, घमहापुर, हरिहरपुर, सरसवां, कानूडीह, दादूपुर, ऐढ़ें, बनवारीपुर, हरिबल्लपुर, गोइठहां, हृदयपुर, सिंहपुर, खजुही, खरीदपुर, संदहा सहित कई गांवों के किसान इसमें सम्मिलित हुए।
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अलग-अलग गांवों से आए किसान महापंचायत के दौरान आपस में बातचीत करते हुए सरकार और जिला प्रशासन को कोस रहे थे। कहना था कि सूखे और बाढ़ की प्राकृतिक मार से जूझने वाले किसानों पर अब सरकार की मार पड़ रही है। हालात यही रहे तो किसान का बेटा खेती नहीं करेगा। अंततः इसका प्रभाव देश भर की खाद्यान्न व्यवस्‍था पर पड़ेगा। अच्छा हो कि सरकार किसानों की कद्र करे आैर उसे उनका वाजिब हक दे।
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