वाराणसी। गुदा संबंधित बीमारियाें के उपचार के लिए देश का पहला राष्ट्रीय क्षार सूत्र चिकित्सा संसाधन केंद्र बीएचयू में स्थापित किया गया है। मंगलवार को इसका उद्घाटन कुलपति डा. लालजी सिंह करेंगे। इसमें अत्याधुनिक मशीनों से मरीजों की जांच की जाएगी। इस केंद्र के खुलने से गुदा संबंधी बीमारियों का उपचार आसानी से किया जा सकेगा। सोमवार को बीएचयू के पीपीपी सेल के सभागार में आयोजित प्रेसवार्ता में यह जानकारी सेंटर के समन्वयक प्रो. मनोरंजन साहू ने दी।
उन्हाेंने बताया कि 2008 में स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस केंद्र की स्थापना के लिए लगभग पांच करोड़ रुपये दिए थे। इसके बाद इसका निर्माण शुरू हुआ। प्रथम चरण में यहां 26 मरीजाें के भर्ती की व्यवस्था रहेगी। छह महीने बाद यह क्षमता दोगुनी हो जाएगी। उन्हाेंने बताया कि पिछले पांच सालाें के दौरान बीएचयू अस्पताल के आयुर्वेद विभाग में क्षार सूत्र विधि से उपचार कराने वाले मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। देश के विभिन्न हिस्साें के अलावा अमेरिका, जर्मनी, नेपाल, बांग्लादेश, भूटान से भी मरीज यहां पहुंचने लगे हैं। अब तक पचास हजार मरीजाें का इस विधि से इलाज किया जा चुका है। नए केंद्र के खुलने के बाद अस्पताल में मरीजाें के उपचार की क्षमता दोगुनी हो जाएगी। प्रेसवार्ता में आईएमएस निदेशक प्रो. आरजी सिंह, माडर्न मेडिसिन की डीन प्रो. मांडवी सिंह, आयुर्वेद संकाय के डीन प्रो. सीबी झा, प्रो. आनंद चौधरी आदि उपस्थित थे।
सेंटर की विशेषताएं
-एनोरेक्टल अल्ट्रासोनोग्राफी मशीन: इसके सहारे यह पता लगाया जा सकेगा कि बवासीर, भगंदर, फिसर कितना गंभीर है।
- 16 चैनल एनल मैनोमेट्री मशीन: आपरेशन के दौरान अक्सर कुछ ऐसी मांसपेशियां कट जाती हैं जिससे मरीज को दिक्कत होती है। इस मशीन के माध्यम से केवल वैसी मांसपेशियाें को ही काट कर निकाला जा सकेगा जो बीमारी के कारण खराब हो चुकी होंगी।
- वीडियो कोलोनोस्कोपी: इस मशीन के माध्यम से बड़ी आंत में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को पकड़ा जा सकेगा।
- बवासीर, भगंदर, फिसर का उपचार पहले एक धागे में आयुर्वेदिक दवाएं लगाकर (क्षार सूत्र विधि) किया जाएगा। अगर इसके बाद भी बीमारी ठीक नहीं हुई तो आपरेशन किया जाएगा।
- सेंटर में दो आपरेशन थियेटर बनाए गए हैं। पहला छोटा सर्जरी के लिए और दूसरा बड़ी सर्जरी के लिए।