पैसा जमा करने के बाद उस कंपनी की अनीता जैन ने उन्हें फोन कर केमिकल भेजा। फिर, सिलविया रिचर्ड ने बताया कि यूनाइटेड किंगडम से जॉन डेविड पूरा केमिकल खरीद लेंगे। जॉन डेविड से कई बार बात हुई और उसने कई बार बनारस आने का आश्वासन देकर पर्चेज ऑर्डर भी ई-मेल किया।
मगर, आज तक कोई उनका केमिकल खरीदने नहीं आया। पदम चंद अग्रवाल ने पुलिस को बताया कि जो नौ लाख 35 हजार रुपये गंवाए हैं, उसमें से आधी रकम अपने रिश्तेदारों से उधार ली थी। इस संबंध में साइबर क्राइम थाना प्रभारी विजय नारायण मिश्र ने बताया कि मुकदमा दर्ज कर मोबाइल व खाता नंबरों और ई-मेल की मदद से प्रकरण की जांच की जा रही है।
तकनीक के अच्छे जानकार माने जाने वाले आईआईटी-बीएचयू से जुड़े तीन लोग बीते 15 दिनों में साइबर क्राइम के शिकार हो चुके हैं। पदम चंद अग्रवाल से पहले बीते 11 अक्तूबर को आईआईटी-बीएचयू से रिटायर्ड प्रोफेसर डॉ. तिलक राज मानखंड की तहरीर पर लंका थाने में मुकदमा दर्ज किया था।
डॉ. मानखंड एक स्पीड पोस्ट को ट्रैक करते समय एक अनजान मोबाइल नंबर पर कॉल कर 94 हजार रुपये गवां दिए थे। इसी तरह चार अक्तूबर को आईआईटी-बीएचयू की छात्रा आर्या भगत की तहरीर पर लंका थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था। आर्या भगत को उनके पिता के दोस्त बन कर एक जालसाज ने पांच हजार रुपये अपने खाते में ट्रांसफर करा लिया था।