महज 45 मिनट की बारिश में शहर की सड़कें लबालब भर गईं। इतनी ही देर में 30 मिलीमीटर वर्षा हुई लेकिन चारों तरफ जलभराव नजर आया। करोड़ों रुपये खर्च करके बनाई गई जलनिकासी की व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त नजर आई। लगभग डेढ़ घंटे तक शहर की तमाम सड़कों घुटने तक पर पानी भरा रहा।
राहगीर परेशान रहे। सबसे ज्यादा दिक्कत सड़क पर बने गड्ढों में पानी भरने से हुई। इसके चलते बारिश बंद होने के बाद भी काफी देर तक जाम लगा रहा। स्कूली बच्चे बसों में फंसे रहे और दो घंटे बाद घर पहुंचे।
बुधवार की सुबह धूप खिली थी लेकिन दोपहर बाद बादल छाने लगे और बारिश शुरू हो गई। कुल 45 मिनट तक झमाझम बारिश हुई। इस अवधि में बीएचयू की मौसम विज्ञान इकाई ने 30 मिलीमीटर वर्षा रिकार्ड की। ग्रामीण इलाकों में अपेक्षाकृत कम बारिश हुई।
बाबतपुर मौसम कार्यालय में 11.2 मिलीमीटर बारिश मापी गई। इस बारिश ने नगर निगम की जल निकासी व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी। नगर निगम कार्यालय के पीछे और बीएसएनएल दफ्तर के सामने की सड़क पर घुटने तक पानी लगा रहा। नौबत यह थी कि बिजली विभाग के सर्किल आफिस में लोग जा नहीं पाए।
बारिश के बाद रवींद्रपुरी कॉलोनी, कोल्हुआ, विनायका, कमच्छा, गुरुबाग, शिवाला, नगवां, गोदौलिया, नई सड़क, लंका चौराहा, पिपलानी तिराहा से कबीरचौरा मार्ग, बजरडीहा, जोल्हा, जक्खा, औरंगाबाद, लक्सा, सोनिया, सरैयां, नक्खीघाट, पुलकोहना इलाकों में घंटों पानी लगा रहा।
पानी निकलने के बाद कमच्छा, रथयात्रा से सिगरा, गोदौलिया, नई सड़क, गुरुबाग, लक्सा, मलदहिया, लहुराबीर, मैदागिन, महमूरगंज, भिखारीपुर तिराहा, अंधरापुल, इंगलिशिया लाइन तिराहा, पांडेयपुर चौराहे पर भीषण जाम लगा रहा। घुटने भर पानी में खड़े होकर यातायात संभालने की जहमत कौन उठाए। लिहाजा चौराहों पर खड़े पुलिसकर्मी तमाशबीन बने रहे।