काशी विश्वनाथ मंदिर के दो लिपिकों समेत तीन कर्मचारियों को मंगलवार की रात हटा दिया गया। उनको कमिश्नरी स्थित कार्यपालक समिति के सभापति के दफ्तर से संबद्ध किया गया है और मंदिर के रिकार्ड, पत्रावलियों और संपत्ति दस्तावेजों के रखरखाव की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
दक्षिणा लेते मंदिर के दो पुजारियों की सीसीटीवी फुटेज लीक होने के मामले में मुख्य कार्यपालक अधिकारी अजय कुमार अवस्थी को भी नोटिस जारी किया गया है। कार्यपालक समिति के सभापति और मंडलायुक्त नितिन रमेश गोकर्ण के निर्देश पर अपर आयुक्त सीपीएन उपाध्याय की ओर से यह कार्रवाई की गई है।
पखवाड़े भर से विश्वनाथ मंदिर में पुजारियों और लिपिकों के बीच दान तथा चढ़ावे में हिस्सेदारी को लेकर घमासान चल रहा था। कर्मचारियों पर हुई कार्रवाई को इसी से जोड़ कर देखा जा रहा है। विवाद समाप्त करने के लिए मंगलवार को कमिश्नरी स्थित सांख्यिकी अधिकारी के कक्ष को ही खाली कराकर उसमें मंदिर के कार्यपालक समिति के सभापति का दफ्तर खोला गया।
अब तक मंदिर में प्रमुख पटल देख रहे वरिष्ठ लिपिक अरुण मिश्रा, दिनेश पांडेय और सेवादार गणेश तिवारी को मंदिर से हटाकर इस कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया। मंडलायुक्त ने कार्यपालक समिति का दफ्तर खोलने और तीनों कर्मचारियों को इस दफ्तर से अटैच करने की पुष्टि की है।
उन्होंने बताया कि मंदिर के कार्यों और परिषद के फैसलों के समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए यह नई व्यवस्था बनाई गई है। इसे किसी पुराने विवाद से जुड़ी कार्रवाई के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उल्लेखनीय है कि बीती 31 जुलाई को गर्भगृह में दक्षिणा उठाकर जेब में रखते हुए वरिष्ठ अर्चक डॉ. गणपति झा को सीसीटीवी फुटेज में कैद किया गया था। इस आधार पर सीईओ ने उन्हें निलंबित कर उनके विरुद्ध चौक थाने में प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए तहरीर दे दी थी।
डॉ. गणपति ने उच्चाधिकारियों से मिलकर इसमें अफसरों-लिपिकों की मिलीभगत की शिकायत की थी। कहा था कि लिपिक पुजारियों से महीना वसूल रहे हैं और उल्टा उन्हें फंसाया जा रहा है। इसके बाद एक और अर्चक नीरज पांडेय को भी दक्षिणा लेने के आरोप में आरोप पत्र पकड़ा दिया गया।
इन दोनों पुजारियों की सीसीटीवी फुटेज की सीडी टीवी चैनलों पर भी चलाई गई थी। सीईओ को जारी नोटिस में पूछा गया है कि गर्भगृह के फुटेज की सीडी चैनलों के दफ्तर तक कैसे पहुंची। ऐसा अफसर के निर्देश पर हुआ या किसी और कारण से।