जिला स्वास्थ्य समिति की हर महीने होने वाली बैठक में आयुष्मान योजना की समीक्षा की जाती है। इसमें आयुष्मान कार्ड बनाने के लक्ष्य को पूरा करने के साथ ही इससे मिलने वाले लाभ पर भी चर्चा होती है। स्थिति यह है कि नवंबर से लेकर फरवरी तक हुई बैठकों में हर महीने कार्ड बनाने का लक्ष्य कम होने पर सीडीओ की ओर से चेतावनी जारी की जा रही है। पिछले महीने हुई बैठक में भी सीडीओ ने सभी लाभार्थियों को योजना का पूरा लाभ दिलाने और इसकी मॉनिटरिंग करने का निर्देश अधिकारियों को दिया था।
ये भी जानें
- आयुष्मान योजना से जुड़े अस्पताल: 230
- गोल्डन कार्ड बने: 12,52,259
- निशुल्क इलाज: एक परिवार को पांच लाख रुपये तक सालाना
चोलापुर निवासी 60 वर्षीय बुजुर्ग को लीवर में संक्रमण की शिकायत थी। जनवरी महीने में उन्होंने चोलापुर के एक निजी अस्पताल में इलाज कराने पहुंचे। उनके पास आयुष्मान कार्ड भी था। परिजन चंद्रमा प्रसाद ने बताया कि आयुष्मान कार्ड का नंबर अस्पताल में जमा किया गया। इसके बाद भी 12 हजार रुपये खर्च करना पड़ा। पूछने पर खर्च की सही जानकारी भी नहीं मिल सकी। इसके बाद परिजन उनको लेकर मंडलीय अस्पताल कबीरचौरा आए, यहां निशुल्क इलाज कराया।
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केस-2
लोहता निवासी 70 वर्षीय झगड़ू राम के पास आयुष्मान कार्ड था। पेट में दर्द, सांस लेने में तकलीफ पर परिजन पिछले सप्ताह भिखारपुर स्थित एक अस्पताल लेकर गए। यहां उन्होंने कार्ड होने की जानकारी दी लेकिन अस्पताल से कार्ड सही तरीके से न चलने की जानकारी दी गई। परिजनों से इलाज का खर्च जमा करने को भी कहा गया। इसके बाद परिजन वापस आए। झगड़ू राम ने बताया कि इसी कार्ड पर पहले भी निशुल्क इलाज हुआ था लेकिन अब क्यों नहीं लिया गया, यह जानकारी नहीं दी गई।
अधिकारी बोले
आयुष्मान योजना से जुड़े अस्पतालों में कौन कौन सी जांच, इलाज, सर्जरी की सुविधा उपलब्ध है। इसका डिस्प्ले बोर्ड सभी को लगाना अनिवार्य है। विभाग की ओर से पंजीकृत अस्पतालों की नए सिरे से सूची तैयार कराकर बोर्ड लगाने की फोटो मांगी जाएगी। नियम का पालन न करने वाले अस्पतालों का नाम भी योजना से बाहर करने की कार्रवाई की जाएगी। -डॉ. राजेश प्रसाद, प्रभारी सीएमओ