बीएचयू में कर्म, न्याय, विधि और शल्य सहित प्राचीन भारतीय सूत्रों पर रिसर्च करके उसे आधुनिक विज्ञान के साथ जोड़ा जाएगा। 21 टेक्नो फ्रेंडली वैदिक विद्वान रिसर्च करेंगे। सुश्रुत, जैमिनी, नारद, विश्वामित्र, गौतम, वादरायण और सनत्कुमार के सूत्रों, सिद्धांतों और संहिताओं को तकनीक, इंजीनियरिंग, अंतरिक्ष, खगोल, विधि और मैनेजमेंट के साथ मिलाकर अध्ययन किया जाएगा। जैसे कि महर्षि गौतम के न्याय शास्त्र की मूल बातों को आज के विवादों पर लागू करके देखा जाएगा कि कितना कारगर है। वहीं, जैमिनी की मीमांसा और विश्वामित्र के कर्म सिद्धांत नारद मुनि के भक्ति सूत्रों को आज की आधुनिकता के साथ मिलाकर रिसर्च किया जाएगा।
बीएचयू के वैदिक विज्ञान केंद्र में नए 21 वैदिक विद्वानों की नियुक्तियां होंगी, जिन्हें आधुनिक विज्ञान का भी ज्ञान होना जरूरी होगा। इनकी योग्यता का विवरण बीएचयू ने जारी कर दिया है। इनमें सात विद्वान सात ऋषियों के चेयर प्रोफेसर और बाकी 14 उनके अंतर्गत रिसर्च का कार्य करेंगे। केंद्र में इसका एजेंडा बनाया जाएगा।
चेयर प्रोफेसर सहित विजिटिंग फेलो के रिसर्च की समीक्षा वैदिक विज्ञान केंद्र की संचालन समिति की ओर से की जाएगी। इसी के आधार पर उनका कार्यकाल आगे के लिए बढ़ाया जाएगा। इनका कार्यकाल दो से लेकर पांच साल तक का होगा। ये दोबारा आवेदन के लिए पात्र माने जाएंगे।