गंगा रेती पर बंगला छवाओ मोरे राजा....
कथक के भाव नृत्य से फूलों की होली, प्रकृति को दिखाया
अमर उजाला ब्यूरो
वाराणसी।
धर्म एवं संस्कृति नगरी काशी में गुरुवार को राजेंद्र प्रसाद घाट पर आयोजित ‘रस बनारस’ सांस्कृतिक संध्या में ठुमरी, चैती, होली गीत और कथक भाव नृत्य के संगम से गंगाघाट संगीतमय हो गया। लोकगायिका मालिनी अवस्थी ने ऋतु गीतों के माध्यम से बनारस की उपशास्त्रीय गायन परंपरा की खूबियों से परिचित कराया। उन्होंने मिश्र खमाज में मद के भरे तोरे नैन...की प्रस्तुति कर खूब वाहवाही लूटी। दादरा में गंगा रेती पर बंगला छवाओ मोरे राजा की प्रस्तुति से उन्होंने महफिल लूट ली।
इसके बाद उन्होंने होली पर उड़त अबीर गुलाल लाल...और रंग डारूंगी नंद के लालन पे...से सभी का दिल जीत लिया। वहीं, राग गारा में उन्होंने दादरा सुनाया। कथक नर्तक सौरव-गौरव ने उनके होली गीत पर गोपियों के भाव कथक की मुद्राओं के माध्यम से प्रस्तुत किए। इसके बोल थे, सांवरिया प्यारा रे मोरी गोइयां...तथा चढ़ल चईत चित लागे न रामा...से श्रोताओं का खूब मनोरंजन किया। राजेंद्र प्रसाद घाट पर बने मुक्ताकाशीय मंच से कलाकारों ने एक से बढ़कर एक प्रस्तुति दी। तबले पर उस्ताद अकरम खां ने साथ दिया। हारमोनियम पर पंडित धर्मनाथ मिश्र तथा तानपुरे पर अनुप्रिया रहीं।
सांस्कृतिक संध्या की दूसरी प्रस्तुति शास्त्रीय संगीत और जयपुर घराने की प्रख्यात कलाकार श्रुति सड़ोलीकर की रही। उन्होंने राग तिलक कामोद में रूपक काल में निबद्ध रचना सुरसंगत राग विद्या जो कंठ कर दिखावे...सुनाया। राग मालकौस में कृष्ण माधव राम.. झप ताल में निबद्ध रचना की प्रस्तुति दी। तबले पर विनोद लेले और हारमोनियम पर श्यामा कुमार भारती ने साथ दिया। कार्यक्रम की अंतिम प्रस्तुति कथक की रही। कलाकार विशाल कृष्णा ने भाव नृत्य से प्रकृति के स्वरूप, पशु पक्षियों के कलरव और पारंपरिक कथक से महफिल लूट ली। पहली प्रस्तुति मां गंगा को समर्पित रही। इसमें देवी सुरेश्वरी भगवती हर-हर गंगे की प्रस्तुति दी। वहीं, जमुना तट श्याम खेलें होली से खूब ताली बटोरीं। तबले पर श्याम कुमार मिश्रा, बोल पढ़ंत में कुशल कृष्णा रहे।
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कलाकारों को मिलेगा बेहतर मंच, काशी में जल्द होगा बड़ा आयोजन
वाराणसी। सांस्कृतिक मंत्रालय की ओर से आयोजित चार दिवसीय रस बनारस के समापन अवसर पर मुख्य अतिथि केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री महेश शर्मा ने कहा कि जल्द ही बड़े सांस्कृतिक आयोजन कराने की तैयारी है। इसकी शुरुआत काशी से होगी और देश के बड़े 12 शहरों में आयोजन कराया जाएगा। इस मौके पर उन्होंने मंच पर मालिनी अवस्थी सहित शामिल कलाकारों को सम्मानित किया। रस बनारस के चार दिवसीय आयोजन के अंतर्गत अस्सी घाट पर शिल्प मेला और लोक नृत्यों पर आधारित सांस्कृतिक संध्या का आगाज 19 फरवरी को किया गया था। इसमें 12 से अधिक राज्यों के लोक एवं आदिवासी कलाकारों ने अलग-अलग विधाओं का प्रदर्शन किया।