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पूर्वांचल में 16 प्रजाति के सांप: कोबरा, अजगर और करैत से जान जाने का खतरा, सांप डंसे तो जरूर करें ये काम

Sat, 19 Jul 2025 07:49 PM IST
प्रगति चंद रबीश श्रीवास्तव, अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी।

सार

पूर्वांचल में 16 प्रजाति के सांप मिलते हैं। कोबरा, अजगर और करैत से जान जाने का खतरा होता है। ऐसे में सांप डंसे तो सरकारी अस्पताल जाएं। हर जगह एंटी स्नेक वेनम उपलब्ध है, जो निशुल्क लगता है। 
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सांप - फोटो : Freepik
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विस्तार
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काशी सहित पूर्वांचल के 10 जिलों में 16 प्रजाति के सांप मिलते हैं। इनमें चार प्रजाति के सांप (कोबरा, करैत, धामिन और अजगर) ज्यादा खतरनाक हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक इन्हीं चार प्रजाति के सापों के डंसने ज्यादा मौतें हो रही हैं। सांप के डंसने से व्यक्ति डर जाता है। घबराहट में ही कार्डियक अरेस्ट हो रहा है। सांप डंसे तो डरें नहीं, तत्काल सरकारी अस्पताल जाएं। 

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हर अस्पताल में एंटी स्नेक वेनम उपलब्ध है जो निशुल्क लगता है। वाराणसी के साथ ही मिर्जापुर, भदोही, जौनपुर, गाजीपुर आदि जिलों में कोबरा, करैत ज्यादा दिखाई देते हैं। धामिन, दोमुहां, डेड़हा सांपों के साथ ही अजगर भी डंसता है। पिछले तीन साल में वाराणसी के ग्रामीण इलाकों में कछवा, राजातालाब, मिर्जामुराद, चौबेपुर इलाके में सबसे ज्यादा तीन हजार से अधिक कोरौत, कोबरा, धामिन सांप पकड़े जा चुके हैं।

यह भाव छोड़ें कि अब नहीं बचेंगे
आईएमएस बीएचयू में हृदय रोग विभाग के प्रो. ओमशंकर का कहना है कि सापों को डंसने के बाद लोगों को ऐसा लगता है कि अब वह नहीं बचेंगे। इस वजह से दहशत में आ जाते हैं। इस वजह से कार्डियक अरेस्ट होता है। करैत, कोबरा, अजगर आदि डंस लें तो, जितना जल्दी हो सके, संबंधित व्यक्ति को अस्पताल लेकर जाना चाहिए। समय से उपचार अगर न मिले तो जान जाने का खतरा ज्यादा रहता है।
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10 दिन में काशी में दो की मौत, सोनभद्र, मिर्जापुर, चंदौली में ज्यादा मामले

बरसात में सांपों के डंसने की घटनाएं बढ़ी हैं। शहरों की की तुलना में गांव में ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं। सोनभद्र, मिर्जापुर, चंदौली में सर्पदंश के ज्यादा मामले आए हैं। काशी में पिछले दस दिन में दो लोगों को सांप ने डंसा है। 8 जुलाई को मिर्जामुराद के अरका कसरायपुर गांव में खपरैल के मकान में सामान निकाल रहे लालचंद्र बिंद (70) को सांप ने डंस लिया था। 

सूचना पाकर घर में पहुंचे रतन कोबरा ने देखा कि वहां सांपों का जोड़ा था। रतन ने बताया कि सांपों के जोड़ों को अलग कर दोनों को जंगल में छोड़ा गया। उधर, चौबेपुर के सिरिस्ती गांव में गीता देवी (48) को 17 जुलाई सांप ने डंस लिया। परिजन गीता को सीएचसी नरपतपुर लेकर गए, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। यहां पता चला कि महिला को करैत ने डंसा था।

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अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों पर निशुल्क लगता है एंटी स्नेक वैनम
जिले के अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों पर निशुल्क एंटी स्नेक वेनम लगता है। सीएमओ डॉ. संदीप चौधरी का कहना है कि बारिश से पहले ही जिला, मंडलीय अस्पताल के साथ ही सभी प्राथमिक, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर जरूरत के हिसाब से एंटी स्नेक वेनम भिजवाया गया है। यहां आने पर संबंधित व्यक्ति को निशुल्क एंटी वेनम लगवाया जा रहा है। जिले में पर्याप्त एंटी स्नेक वेनम उपलब्ध है।

काशी में यहां निशुल्क लगता एंटी स्नेक वेनम

  • दीनदयाल उपाध्याय जिला अस्पताल
  • मंडलीय अस्पताल कबीरचौरा
  • लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल रामनगर
  • शहरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शिवपुर
  • सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र आराजीलाइन
  • सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नरपतपुर
  • सामुदायिक स्वासथ्य केंद्र मिसिरपुर

पूर्वांचल सांप की ये प्रजातियां

  • गेहुअन जिसे कोबरा भी कहते हैं।
  • धामिन
  • अजगर
  • चीतर सांप
  • वुल्फ स्नेक
  • कुकुरी सांप
  • रेड सैंड बोवा सांप
  • करैत सांप
  • तेलिया सांप
  • सैंड सांप
  • पानी वाला सांप
  • ब्लैक सैंड बोवा सांप

सांप के ऊपरी हिस्से से होती है विषैले की पहचान

बीएचयू में जंतु विज्ञान विभाग की पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर चंदना हलदर का कहना है कि पूर्वांचल में सांप की 16 प्रजातियां हैं लेकिन पूरे यूपी में सांपों की 60 प्रजातियां हैं। सांपों के ऊपरी हिस्से का देखकर उसके विषैले होने की पहचान की जा सकती है। करैत की दो-चार प्रजातियां मिलती हैं जिसको कोबरा भी बोला जाता है। विषैले सांप ने अगर फन फैलाए और उस पर कोई निशान नहीं दिखे तो साधारण कोबरा, अगर सिर पर निशान दिख जाए तो किंग कोबरा और अगर फन फैलाने पर सिर पर एक तिलक लगाने जैसा निशान दिखे तो यह भी कोबरा होता है।

रतन कोबरा का दावा- अब तक 2600 हजार सांप पकड़े
वाराणसी ही नहीं अगर आसपास के जिलों में अगर कहीं सांप निकलने की सूचना मिलती है तो मिर्जामुराद के गौर गांव में रहने वाले रतन गुप्ता तुरंत निकल पड़ते हैं। अब तक उन्होंने सबसे अधिक कोबरा सांपों को पकड़ा है। इस वजह से लोग उनको रतन कोबरा के नाम से बुलाने लगे हैं। करीब 25 साल से सांपों को पकड़ रहे हैं। रतन ने बताया कि अब तक वाराणसी के साथ ही भदोही, मिर्जापुर, चंदौली आदि इलाके में 26 हजार सांप पकड़ चुके हैं। रतन ने बताया कि कमरे में सांप है तो जल्दी पकड़ा जाता है, अगर किसी बिल या नींव में चला गया तो आठ से 10 घंटे लग जाता है। एक बार तो नींव में सांप चला गया तो 30 घंटे का समय लग गया था।

मऊ एंटी वेनम

  • जिला अस्पताल - 360
  • सभी दस सीएचसी - 25-25
  • इमरजेंसी में 50 की उपलब्धता

गाजीपुर 
  • जिला मुख्यालय पर 1419 वायल एंटी वेनम उपलब्ध है।
  • जिले में 19 सीएचसी है। प्रत्येक पर 30-30 वायल एंटी वेनम है।

चंदौली
  • संयुक्त जिला अस्पताल में 150
  • 4 पीएचसी में 200
  • 5 सीएचसी में 250
  • जिला संयुक्त चिकित्सालय चकिया में 120 एंटी वेनम है।
  • जिला औषधि केंद्र में 1135 एंटी वेनम सुरक्षित रखा गया है।

भदोही एंटी वेन

  • जिला अस्पताल - 250
  • महाराजा बलवंत सिंह राजकीय अस्पताल भदोही - 275
  • सभी सीएचसी - 10-10
  • सभी पीएचसी - 5-5
  • जिला औषधि केंद्र में 1100 सुरक्षित रखा गया है।
 
आजमगढ़ में एंटी वेनम की स्थिति...
  • जिला अस्पताल: 579 वॉयल
  • 23 सीएचसी: 10-10
  • 76 पीएचसी: 5-5

सोनभद्र

  • सर्पदंश के बाद तत्काल यहां आएं, मिलेगा एंटी स्नैक वेनम 
  • सोनभद्र जिला अस्पताल सह मेडिकल कॉलेज
  • संयुक्त अस्पताल डिबुलगंज (अनपरा)
  • सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चोपन
  • सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र म्योरपुर
  • सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बभनी
  • सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र दुद्धी
  • सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कोन
  • सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नगवा (वैनी)
  • सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चतरा
  • सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र करमा
  • सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र घोरावल
  • सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मधुपुर
  • सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शाहगंज
  • धनवंतरी चिकित्सालय एनटीपीसी रिहंद
  • प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बीजपुर (प्राइमरी डोज)

जौनपुर में एंटी वेनम
  • जिला अस्पताल में - 700
  • सभी सीएचसी पर - 50-50
  • सभी पीएचसी पर - 10-10

बलिया
जिला अस्पताल सहित 36 अस्पतालों में 582 एंटी स्नेक वेनम वॉयल मौजूद है। जिला स्टॉक में 1000 हजार वॉयल है।
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सर्पदंश के बाद तत्काल यहां आएं, मिलेगा एंटी स्नैक वेनम 

  • मंडलीय अस्पताल, मेडिकल कॉलेज
  • सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जमालपुर
  • सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अहरौरा
  • सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कछवां
  • सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चचेरी मोड़ चुनार
  • सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र राजगढ़
  • सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मड़िहान
  • सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लालगंज
  • सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र विंध्याचल
  • प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हलिया
  • प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र विजयपुर
  • सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चील्ह
  • प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पड़री
  • प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गुरसंडी
  • प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चुनार
  • प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पटेहरा
  • प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सीखड़

इन सभी अस्पतालों में पर्याप्त मात्रा में एंटी स्नेक वेनम उपलब्ध है।

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