केस - 1
जिला अस्पताल में सोमवार (2 मार्च 2026) को टकटकपुर निवासी गुड़िया चौहान (20) की मौत के बाद दो घंटे हंगामा हुआ। आरोप था कि नर्स वार्ड में तैनात नर्स गीता मौर्य को मरीज की हालत के बारे में बताया गया, लेकिन उसने इमरजेंसी ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर को समय से सूचना नहीं दी। सीएमएस डॉ. आर. एस. राम ने पांच सदस्यीय कमेटी गठित कर जांच के आदेश दिए हैं।
केस - 2
25 जनवरी 2026 को चौबेपुर के डुबकियां स्थित एस एन हॉस्पिटल में गाज़ीपुर के हवलदार यादव (55 वर्ष) की इलाज के दौरान मौत हो गई। इस मामले में परिजनों ने अस्पताल के डॉ. सौरभ सिंह और डॉ. रितेश यादव के खिलाफ पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
केस - 3
19 अगस्त 2025 को कबीरचौरा स्थित जिला महिला अस्पताल में मदनपुरा की रिजवाना अपने सास के साथ डिलीवरी के लिए आई थी। यहां दर्द की हालत में भी अस्पताल की स्टाफ नर्स ने उन्हें एक स्थान से दूसरे स्थान खूब दौड़ाया और अंत में केस सिरियस कहते हुए बीएचयू रेफर कर दिया। महिला बाहर पहुंचती इससे पहले ओपीडी की चौखट के बाहर पथरीले बेंच पर ही उसने अपने तिमादारों और आसपास के लोगों की मदद से एक बच्ची को जन्म दे दिया। आनन फानन में महिला को अस्पताल में भर्ती किया गया। मामला उच्च अधिकारियों तक पहुंचने के बाद कई स्टाफ को नोटिस जारी किया गया था।
केस - 4
23 अप्रैल 2025 को आजमगढ़ के रिटायर्ड जवान सुजीत कुमार सिंह का चितईपुर स्थित एपेक्स हॉस्पिटल में ऑपरेशन हुआ था। अस्पताल से छुट्टी होने के बाद उन्हें फिर डॉक्टर को दिखाया गया। जहां डॉक्टर्स की टीम ने उन्हें दूसरे अस्पताल रेफर कर दिया। इसके बाद लखनऊ में इलाज के दौरान सुजीत की मौत हो गई। सुजीत के भाई अमित ने कोर्ट में अस्पताल के खिलाफ केस दर्ज किया। कोर्ट ने मामले में सुनवाई करते हुए 25 फरवरी 2026 को अस्पताल के डॉ. अनुराग दीक्षित और मालिक डॉ. एस. के. सिंह के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया।
इलाज के साथ मरीजों और परिजनों का भरोसा जीतें चिकित्सक
स्वास्थ्य विभाग के अपर निदेशक एनडी शर्मा का कहना है कि अस्पतालों में मरीज भरोसा करके आता है कि उसे इलाज सही तरीके से मिलेगा। लेकिन जब वहीं इलाज में लापरवाही होती है, तो मरीजों और उनके परिजनों का भरोसा टूट जाता है। कई बार डॉक्टर अच्छे से इलाज के बावजूद परिजनों का भरोसा नहीं जीत पाते हैं, जिसके कारण परिजन पुलिस अथवा न्यायालय का भरोसा करते हैं। चिकित्सकों को चाहिए कि वह मरीजों से नरमी से पेश आएं।
अस्पताल में मरीजों की मौत के मामले में शिकायत होने पर बकायदा जांच होती है। देखा जाता है कि मरीज जिस समय अस्पताल आया उस समय उसकी स्थिति क्या थी, उसे कौन-कौन सी दवाएं दी गईं। इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही पाए जाने पर कार्रवाई भी होती है। - एनडी शर्मा, अपर निदेशक, स्वास्थ्य विभाग।