आरोप है कि इस दौरान प्रसूता दर्द से नस फटने की शिकायत करती रही लेकिन डॉक्टर और स्टाफ सब कुछ ठीक होने का दावा करते रहे। शाम करीब चार बजे हालत गंभीर होने की बात कहते हुए रेफर कर दिया गया। धीरज का कहना था कि उसकी बहन को दूसरे कमरे में शिफ्ट कर उसके हाल पर छोड़ दिया गया।
ऑक्सीजन कैप भी हटा लिया गया। महज 10 से 15 मिनट बाद उसकी मौत हो गई। इससे खफा परिजनों ने जमकर नाराजगी जताई। चौकी इंचार्ज लोढ़ी उमाशंकर यादव ने नाराजगी जता रहे लोगों को समझाने की कोशिश की लेकिन वह कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे।
कुछ देर बाद प्रभारी निरीक्षक राॅबर्ट्सगंज रामस्वरूप वर्मा और सीओ सिटी रणधीर मिश्रा भी पहुंचे। कई बार वार्ता के बाद किसी तरह परिजन शांत हुए। अस्पताल प्रबंधन का दावा था कि जिस वक्त प्रसूता को लाया गया उसी समय उसकी हालत गंभीर थी। महज छह यूनिट खून था। रेफर भी किया गया लेकिन परिजन नहीं ले गए। इस बारे में जानकारी के लिए मेडिकल कॉलेज के उप चिकित्सा अधीक्षक तपन मंडल से संपर्क साधा गया लेकिन उन्होंने चुप्पी साध ली।
सीओ रणधीर मिश्रा ने बताया कि अस्पताल प्रबंधन ने प्रसव के समय ही काफी कम खून होने की जानकारी दी है। परिवार के लोगों को समझा-बुझाकर शांत करा दिया गया है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा जा रहा है।