आरटीओ प्रवर्तन श्यामलाल ने बताया कि एक साल में विभागों के समन्वय से 10 ब्लैक स्पॉट खत्म किए गए हैं। इसमें मोहनसराय से कैंट के तीन और पड़ाव से रामनगर तक सात ब्लैक स्पॉट खत्म किए गए। इसके अलावा जागरूकता कार्यक्रम चलाने से लोगों ने हेलमेट और सीट बेल्ट लगाना शुरू किया। इससे भी सुधार हुआ है।
टेबल टॉप ब्रेकर बनाने के निर्देश
एडीएम सिटी आलोक वर्मा ने एनएचएआई के अफसरों को निर्देश दिए कि 15 दिन के अंदर हरहुआ चौराहे के दोनों तरफ टेबल टॉप ब्रेकर बनाएं। इसके अलावा 18 जगहों पर रोड साइनेज लगाने का काम 18 दिन में पूरा करके रिपोर्ट करें।
आरटीओ प्रवर्तन श्यामलाल ने बताया कि ऐसी 500 मीटर की वह रोड, जहां तीन साल में पांच भीषण हादसे हुए हैं। उनमें पांच गंभीर रूप से घायल हुए हों या मौत हुई या फिर अलग-अलग हादसों में तीन वर्षों में 10 मौतें हुई हों, उसे ब्लैक स्पॉट मान लिया जाता है। शॉर्ट टर्म में ब्लैक स्पॉट को खत्म करने के लिए संकेतक लगाए जाते हैं।
जेब्रा क्रॉसिंग, साइड रोड पर ब्रेकर, सफेद पट्टी, सोलर लाइट और हाईमास्ट लाइट लगाए जाते हैं। वहीं लॉन्ग टर्म में ब्लैक स्पॉट को खत्म करने के लिए दुर्घटनाओं पर शोध करने के बाद सर्विस रोड, अंडरपास, फ्लाईओवर, फुटओवर ब्रिज का निर्माण किया जाता है। इसके बाद तीन साल तक इसकी निगरानी की जाती है। वहां हादसों की संख्या कम हुई हो तो उस स्पॉट को खत्म मान लिया जाता है।