दोनों की सियासी पारी में अंतर
अरविंद केजरीवाल और अमिताभ ठाकुर की कहानी में बड़ा अंतर है। केजरीवाल ने अपनी नौकरी छोड़ काफी पहले ही एक्टिविस्ट के रूप में काम करना शुरू कर दिया था। जनलोकपाल और सूचना का अधिकार जैसे जनता के मुद्दे उठाकर पहले ही काफी लोकप्रिय हो चुके थे और 2006 में उन्हें मैग्सेसे पुरस्कार भी मिल चुका था। उनके पास अन्ना हजारे जैसा वह संवेदनशील चेहरा भी था जो लोगों को महात्मा गांधी की याद दिलाता था। इंडिया अगेंस्टट करप्शन आंदोलन ने उन्हें एक लोकप्रिय चेहरा बना दिया था।
अमिताभ ठाकुर भी केजरीवाल की तरह बेहद ईमानदार (पुलिस अफसर की) छवि के साथ अपने सख्त रुख के लिए भी जाने जाते रहे हैं। उनकी पत्नी नूतन ठाकुर भी एक्टिविस्ट के रूप में आम आदमी की आवाज उठाती रही हैं। लेकिन अभी तक उनके पास वह जनसमर्थन हासिल नहीं है, जिसके दम पर किसी सियासी पारी को अंजाम तक पहुंचाया जा सकता है। अगर वर्तमान गिरफ्तारी को वे एक सियासी रंग देने में सफल रहते हैं तो उन्हें इसका लाभ मिल सकता है, लेकिन उनके पास अरविंद केजरीवाल जैसी टीम नहीं है जिसकी कमी उन्हें महसूस हो रही होगी।
भाजपा ने कहा, आपराधिक मामला
उत्तर प्रदेश भाजपा प्रवक्ता मनीष शुक्ला ने अमर उजाला से कहा कि योगी आदित्यनाथ सरकार किसी भी आपराधिक मामले में बेहद सख्त रुख अपनाकर कार्रवाई करती रही है। इस मामले में भी जब 16 अगस्त को पीड़िता का आत्मदाह करने का वीडियो सामने आया था, और उसमें अमिताभ ठाकुर पर गंभीर आरोप लगाया गया था, तब सरकार ने इस पर कार्रवाई की।
सरकार ने सीधे कार्रवाई करने के पहले एक एसआईटी का गठन किया और उच्च अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट में अमिताभ ठाकुर को प्राथमिक स्तर पर दोषी पाया है, इसलिए इस कार्रवाई को राजनीति से प्रेरित नहीं कहा जा सकता। इसी मामले में अन्य लोगों पर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है, इस सवाल पर भाजपा नेता ने कहा कि पुलिस जांच कर रही है। अगर इस मामले में अन्य लोगों की भी कोई भूमिका पाई जाती है तो सरकार उन पर भी कार्रवाई करेगी।
क्या हुआ था
घोसी से सांसद अतुल राय पर एक 24 वर्षीय महिला ने आरोप लगाया था कि सांसद ने उसका अपने वाराणसी स्थित आवास पर दुष्कर्म किया था। उसने 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान आरोप लगाया था और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। इस आरोप के बाद भी अतुल राय अपना चुनाव जीतकर संसद पहुंच गए। हालांकि, पुलिस कार्रवाई में बाद में उन्होंने आत्मसमर्पण कर दिया था। सांसद के एक भाई ने उक्त महिला पर ही धोखाधड़ी करने का आरोप लगाते हुए एक शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें अदालत ने उसके खिलाफ नोटिस जारी कर दिया था। कहा जाता है कि इसके बाद से ही वह परेशान थी।
यूपी पुलिस से न्याय न मिलता देख पीड़िता ने अपने एक सहयोगी के साथ दिल्ली में सर्वोच्च न्यायालय के सामने फेसबुक लाइव करते हुए अपने एक साथी के साथ आत्मदाह कर लिया था। बाद में इलाज के दौरान 21 अगस्त को पीड़िता के दोस्त की मौत हो गई थी। वह इस मामले में इकलौता गवाह था। इसके तीन दिन बाद 24 अगस्त को पीड़िता की भी मौत हो गई।
मामले की गंभीरता देख यूपी सरकार ने यूपी पुलिस भर्ती बोर्ड के डीजी आरके विश्वकर्मा और एडीजी नीरा रावत की दो सदस्यीय एसआईटी टीम का गठन कर मामले की जांच की जिम्मेदारी दी थी। कथित तौर पर एसआईटी टीम ने अमिताभ ठाकुर को मामले में लापरवाही बरतने का दोषी पाया है, जिसके बाद उन पर कार्रवाई की गई है।